विलंब: उत्तराखंड हाई कोर्ट की शिफ्टिंग अभी दूर, रामपुर रोड की जमीनों की कीमत में लगने लगी आग

विलंब: उत्तराखंड हाई कोर्ट की शिफ्टिंग अभी दूर, रामपुर रोड की जमीनों की कीमत में लगने लगी आग
Spread the love

हल्द्वानी(आरएनएस) । नैनीताल से उत्तराखंड हाई कोर्ट की शिफ्टिंग का प्रस्ताव अभी सरकारी प्रक्रियाओं और आवश्यक स्वीकृतियों के दौर में है, लेकिन रामपुर रोड पर प्रस्तावित स्थल के नाम पर प्रॉपर्टी कारोबारियों ने ऑनलाइन बाजार गर्म कर दिया है। इंटरनेट मीडिया पर हाई कोर्ट के नजदीक प्लाट उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं। फेसबुक पेज और अन्य डिजिटल माध्यमों पर जमीनों की लंबाई-चौड़ाई, दिशा, कीमत और प्रस्तावित हाई कोर्ट स्थल से दूरी तक बताकर ग्राहकों को आकर्षित किया जा रहा है।
प्रॉपर्टी डीलरों की ओर से किए जा रहे प्रचार में क्षेत्र को भविष्य के बड़े विकास केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि हाई कोर्ट बनने के बाद आसपास व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी और जमीनों के दाम में भारी वृद्धि हो सकती है। इसी उम्मीद के सहारे निवेशकों को जल्द प्लाट खरीदने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। हालांकि, प्रस्तावित परियोजना की मौजूदा स्थिति को देखें तो अभी इसके लिए कई महत्वपूर्ण औपचारिकताएं पूरी होना बाकी हैं।
नैनीताल स्थित हाई कोर्ट को हल्द्वानी के रामपुर रोड क्षेत्र में स्थानांतरित करने के लिए बेलबाबा के पास तराई केंद्रीय डिवीजन की भाखड़ा रेंज की करीब 30 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है। यह भूमि वन क्षेत्र में आती है। ऐसे में इसके हस्तांतरण के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति आवश्यक होगी। जब तक वनभूमि हस्तांतरण की स्वीकृति नहीं मिलती, तब तक परियोजना को धरातल पर आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा।
लोनिवि, प्रशासन और वन विभाग की ओर से संयुक्त सर्वे किया जा चुका है। वनभूमि के बदले पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के लिए बेतालघाट क्षेत्र में जमीन तलाशने की प्रक्रिया भी पूरी की गई है। इसके बाद केंद्रीय पोर्टल परिवेश पर भूमि हस्तांतरण के लिए आवेदन किया गया है। लोनिवि की हल्द्वानी डिवीजन के अधिशासी अभियंता प्रत्यूष कुमार ने बताया कि भूमि हस्तांतरण का आवेदन नोडल स्तर पर पहुंच चुका है। यहां से आवेदन भारत सरकार को भेजा जाएगा। केंद्र से सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। इसके बाद डिजाइन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को अंतिम रूप देने के लिए निजी कंपनी का चयन किया जाना है। यानी हाई कोर्ट शिफ्टिंग की योजना अभी प्रारंभिक और स्वीकृति-आधारित चरण में है। इसके बावजूद प्रॉपर्टी डीलरों ने इसे जमीनों की बिक्री के लिए बड़ा अवसर बनाना शुरू कर दिया है।
रामपुर रोड और आसपास के गांवों को लेकर इंटरनेट मीडिया पर चल रहे पोस्ट में प्लाट की लंबाई-चौड़ाई, दिशा, स्थान, कीमत और सड़क से दूरी जैसी जानकारियां दी जा रही हैं। कई पोस्ट में प्रस्तावित हाई कोर्ट स्थल से जमीन की दूरी बताकर इसे निवेश के लिए आकर्षक बताया गया है। इसके अलावा मौजूदा सड़क की चौड़ाई, नजदीकी स्कूल और हाईवे तक पहुंच को भी प्रचार का हिस्सा बनाया जा रहा है। डीलरों की ओर से क्षेत्र में भविष्य के विकास की संभावनाओं का हवाला देकर ग्राहकों को यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि अभी जमीन खरीदने पर आगे चलकर अधिक लाभ मिल सकता है। हालांकि, परियोजना की स्वीकृतियां और वास्तविक निर्माण समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाई कोर्ट शिफ्टिंग की चर्चा के बाद रामपुर रोड और आसपास के इलाकों में जमीनों को लेकर रुचि बढ़ी है। पिछले करीब दो माह में कुछ क्षेत्रों में जमीनों के दाम बढ़ने की बात सामने आ रही है। प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोग भी इस संभावित परियोजना को बाजार में तेजी का कारण बता रहे हैं। हालांकि, सरकारी स्तर पर अभी केवल भूमि चिह्नीकरण और हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में प्रस्तावित स्थल के आसपास जमीन खरीदने वाले लोगों के लिए यह जरूरी है कि वे भू-अभिलेख, भूमि की प्रकृति, स्वामित्व, दाखिल-खारिज और संबंधित स्वीकृतियों की जांच के बाद ही कोई निर्णय लें।
हाई कोर्ट शिफ्टिंग का प्रस्ताव अभी वनभूमि हस्तांतरण, केंद्रीय स्वीकृति, डिजाइन, डीपीआर और अन्य प्रक्रियाओं से गुजरना बाकी है। इसके बावजूद हाई कोर्ट के नाम पर ऑनलाइन प्लाट बेचने का प्रचार यह संकेत दे रहा है कि प्रॉपर्टी बाजार ने परियोजना के संभावित भविष्य को वर्तमान कारोबार का आधार बना लिया है। अब देखना यह होगा कि सरकारी प्रक्रिया पूरी होने से पहले चल रहे इन प्रचार अभियानों पर संबंधित विभागों की नजर जाती है या नहीं।

Parvatanchal