चर्चित शख़्स : कौन था सुरेंद्र कोली ? पढ़िए, गांव से दिल्ली तक का सफर, पंढेर की कोठी और निठारी कांड में आरोपी बनने की कहानी

चर्चित शख़्स : कौन था सुरेंद्र कोली ? पढ़िए, गांव से दिल्ली तक का सफर, पंढेर की कोठी और निठारी कांड में आरोपी बनने की कहानी
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नोएडा/हरिद्वार(RNS)। हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की मौत की खबर सामने आने के बाद निठारी कांड एक बार फिर चर्चा में है।  चर्चित निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद करीब दो दशक पुराना यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। कोली को निठारी इलाके में बच्चों और एक युवती के लापता होने तथा Rनरकंकाल मिलने NSसे जुड़े मामलों में आरोपी बनाया गया था। अलग-अलग मामलों में उसे कई बार मौत की सजा सुनाई गई, लेकिन लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद वर्ष 2023 में वह सभी मामलों में बरी हो गया था।
कोली का जीवन एक बेहद गरीब परिवार से शुरू हुआ था। अल्मोड़ा के आसपास के एक गांव में उसका परिवार आर्थिक तंगी में जीवन गुजारता था। करीब 26 साल पहले तक वह गांव में बकरियों की देखरेख करता था और आजीविका के सीमित साधनों के बीच अपना जीवन बिता रहा था। बताया जाता है कि उसे खाना बनाने का अच्छा हुनर था। यही हुनर उसके जीवन में एक बड़ा मोड़ लेकर आया।
वर्ष 2000 के आसपास कोली की मुलाकात दिल्ली में रहने वाले एक ब्रिगेडियर से हुई। उन्हें जब कोली के खाना बनाने के हुनर के बारे में पता चला तो उन्होंने उसे अपने यहां काम पर रख लिया। इसके बाद कोली गांव से दिल्ली आ गया। ब्रिगेडियर के घर पर वह खाना बनाने के साथ-साथ साफ-सफाई का काम भी करता था। उस समय तक उसके खिलाफ किसी आपराधिक गतिविधि का कोई मामला सामने नहीं आया था। वह सामान्य घरेलू कर्मचारी के तौर पर जीवन गुजार रहा था। करीब तीन वर्ष बाद परिस्थितियां बदलीं। वर्ष 2003 में ब्रिगेडियर को दिल्ली से बाहर जाना पड़ा। इसके बाद कोली का संपर्क नोएडा सेक्टर-31 की डी-5 कोठी में रहने वाले मोनिंदर सिंह पंढेर से हुआ। कोली दिल्ली या आसपास के क्षेत्र में ही काम करना चाहता था, इसलिए वह पंढेर की कोठी में काम करने लगा। बताया जाता है कि पंढेर के कहने पर कोली अपनी पत्नी को भी नोएडा ले आया था। उस समय पंढेर का परिवार भी नोएडा में रहता था।
परिवार के जाने के बाद बदली परिस्थितियां
वर्ष 2004 में पंढेर का परिवार नोएडा से पंजाब चला गया। इसके बाद कोली की पत्नी भी वापस गांव चली गई। डी-5 कोठी में पंढेर और कोली रह गए।
इसके बाद कोठी में होने वाली गतिविधियों और वहां आने-जाने वाले लोगों को लेकर पुलिस की जांच आगे बढ़ी। पुलिस के अनुसार, कोठी में महिलाओं के आने-जाने की बात सामने आई थी और कोली उनके लिए भोजन तथा अन्य व्यवस्थाएं करता था। निठारी कांड की जांच के दौरान पुलिस ने कोली के व्यवहार और घटनाक्रम को लेकर कई दावे किए। हालांकि, इन मामलों में हुई लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन के साक्ष्यों और जांच पर भी गंभीर सवाल उठे और अंततः विभिन्न मामलों में अदालतों ने कोली को बरी कर दिया।
29 दिसंबर 2006 को सामने आया मामला
निठारी कांड ने 29 दिसंबर 2006 को पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी के आसपास मानव अवशेष और नरकंकाल मिलने की सूचना सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया।
जांच आगे बढ़ने के साथ कई बच्चों और एक युवती के लापता होने के मामले सामने आए। डी-5 कोठी और उसके आसपास के क्षेत्र की जांच की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंपी गई।
जांच के दौरान मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू कर्मचारी सुरेंद्र कोली को आरोपी बनाया गया। इसके बाद मामला अदालतों तक पहुंचा और अलग-अलग मामलों में दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमे चले।
निठारी कांड से जुड़े अलग-अलग मामलों में सुरेंद्र कोली को कई बार मौत की सजा सुनाई गई। वर्ष 2009 से लेकर 2019 तक अलग-अलग अदालतों में चले मामलों में उसे मृत्युदंड दिया जाता रहा। कुछ मामलों में पंढेर को भी दोषी ठहराया गया, लेकिन बाद में उसे अलग-अलग मामलों में राहत मिलती रही। कई मामलों में हाईकोर्ट और बाद में उच्चतम न्यायालय तक कानूनी लड़ाई चली। इस दौरान कोली की फांसी कई बार टली। सबसे चर्चित घटनाओं में 9 सितंबर 2014 का मामला था, जब मेरठ जेल में उसकी फांसी की तैयारी पूरी हो चुकी थी। इसी बीच तड़के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर उसकी फांसी पर रोक लग गई। निठारी कांड में वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद सुरेंद्र कोली को कई मामलों में राहत मिलती गई। अदालतों ने अभियोजन के साक्ष्यों और जांच से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की। 16 अक्तूबर 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी कांड से जुड़े मामलों में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी कर दिया। इसके साथ ही उन पर लगे मामलों की तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
इससे पहले भी अलग-अलग तारीखों पर कोली को विभिन्न मामलों में बरी किया जा चुका था। इस तरह वह व्यक्ति, जिसे वर्षों तक निठारी कांड का मुख्य आरोपी और कई मामलों में मृत्युदंड प्राप्त कैदी माना जाता रहा, अंततः न्यायिक प्रक्रिया में बरी हो गया। हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की मौत की खबर सामने आने के बाद निठारी कांड एक बार फिर चर्चा में है। करीब दो दशक पहले सामने आया यह मामला आज भी देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में गिना जाता है।
कोली की कहानी गांव की गरीबी से शुरू होकर दिल्ली में घरेलू काम तक पहुंची और फिर नोएडा की डी-5 कोठी से जुड़े बहुचर्चित आपराधिक मुकदमों तक पहुंची। उसके खिलाफ अलग-अलग अदालतों में चली लंबी कानूनी लड़ाई, बार-बार सुनाई गई मौत की सजा, फांसी टलने की घटनाएं और अंततः बरी होने का घटनाक्रम इस मामले को भारतीय न्यायिक इतिहास के चर्चित मामलों में शामिल करता है।

निठारी कांड की प्रमुख तारीखें
29 दिसंबर 2006: डी-5 कोठी के आसपास मानव अवशेष मिलने का मामला सामने आया।
2007 के बाद: मामले की जांच सीबीआई ने आगे बढ़ाई और पंढेर तथा कोली के खिलाफ मुकदमे चले।
13 फरवरी 2009: एक मामले में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को मृत्युदंड सुनाया गया; बाद में पंढेर को राहत मिली।
2010: कोली को अलग-अलग मामलों में कई बार मृत्युदंड सुनाया गया।
9 सितंबर 2014: मेरठ जेल में प्रस्तावित फांसी पर अंतिम समय में रोक लग गई।
2016-2019: अलग-अलग मामलों में कोली को फिर मृत्युदंड की सजा सुनाई गई और कई मामलों में पंढेर को राहत मिली।
2021-2022: कोली को अलग-अलग मामलों में बरी किए जाने के आदेश आए।
16 अक्तूबर 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी से जुड़े मामलों में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी कर दिया।
18 सितंबर 2026: हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की मौत की खबर सामने आने के बाद निठारी कांड फिर चर्चा में आ गया।

कभी हरिद्वार तो कभी देहरादून में आजीविका के लिए छोटे-मोटे काम करता था कोली

बहुचर्चित निठारी कांड से जुड़े रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। शुक्रवार सुबह भूपतवाला क्षेत्र में भारत माता मंदिर से पहले किराये पर लिए गए चाय के खोखे के अंदर उसका शव फंदे से लटका मिला। सुरेंद्र कोली की मौत की खबर सामने आने के बाद एक बार फिर निठारी कांड चर्चा में आ गया। बताया गया कि अदालत से निठारी कांड में बरी होने के बाद नवंबर 2025 में जेल से बाहर आने पर कोली ने हरिद्वार को अपना ठिकाना बनाया था। हालांकि, रिहाई के बाद वह किसी एक स्थान पर लंबे समय तक नहीं रहा। कभी हरिद्वार तो कभी देहरादून में रहा और आजीविका के लिए छोटे-मोटे काम करता रहा।
जानकारी के मुताबिक सुरेंद्र कोली कुछ समय से हरिद्वार के रोशनाबाद क्षेत्र में चाय और खाने की ठेली लगाकर गुजर-बसर कर रहा था। इससे पहले वह देहरादून भी गया था, लेकिन कुछ समय बाद वापस हरिद्वार लौट आया। करीब तीन दिन पहले ही उसने भूपतवाला क्षेत्र में भारत माता मंदिर से पहले एक चाय का खोखा किराये पर लिया था। इसी खोखे से वह अपनी रोजी-रोटी चलाने लगा था। स्थानीय लोगों के मुताबिक शुक्रवार सुबह खोखे के अंदर एक व्यक्ति संदिग्ध अवस्था में दिखाई दिया। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो अंदर सुरेंद्र कोली का शव फंदे से लटका मिला। सप्तऋषि चौकी प्रभारी खेमेंद्र गंगवार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव की पहचान और सत्यापन की कार्रवाई की। इसी दौरान उसके निठारी कांड से जुड़े होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया और आसपास भी चर्चा शुरू हो गई। कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि मौत से पहले उसकी गतिविधियां कैसी थीं और किन परिस्थितियों में उसने यह कदम उठाया।
सुरेंद्र कोली मूल रूप से अल्मोड़ा जिले की भिकियासैंण तहसील के मंगरुखाल गांव का रहने वाला था। करीब दो दशक पहले उसका नाम निठारी कांड के मामले में सामने आया था। वर्ष 2006 में नोएडा के निठारी क्षेत्र में कई बच्चों और युवतियों के लापता होने तथा हत्याओं के मामलों ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस मामले की जांच और सुनवाई के दौरान सुरेंद्र कोली मुख्य आरोपी पक्ष से जुड़ा रहा। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद विभिन्न मामलों में अदालतों की कार्यवाही चली। अंततः निठारी कांड से जुड़े मामलों में अदालत से बरी होने के बाद वह नवंबर 2025 में जेल से बाहर आया था। जेल से बाहर आने के बाद कोली ने सामान्य जीवन शुरू करने की कोशिश की। हरिद्वार में रहकर उसने चाय और खाने की ठेली जैसे छोटे कारोबार का सहारा लिया। बताया जाता है कि वह कुछ समय रोशनाबाद में रहा और वहां ठेली लगाकर अपना खर्च चलाता था। इसके बाद देहरादून चला गया, लेकिन वहां अधिक समय नहीं रहा और फिर हरिद्वार लौट आया। भूपतवाला में तीन दिन पहले ही नया खोखा किराये पर लेना इसी सिलसिले की अगली कड़ी बताया जा रहा है। हालांकि, उसकी मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या रहे, इसका पता पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। फिलहाल मौत को प्रथमदृष्टया फांसी से हुई मौत माना जा रहा है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ और अन्य तथ्यों की पड़ताल करेगी। निठारी कांड के चर्चित नाम के रूप में लंबे समय तक सुर्खियों में रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में हुई मौत ने उसके जीवन के आखिरी दौर को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जेल से रिहाई के बाद छोटे कारोबार के सहारे जीवन आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे कोली की अचानक हुई मौत से स्थानीय लोग भी हैरान हैं।

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