जालसाज़ी: जीवित व्यक्ति को मृत दिखाकर जमीन हड़पने का खेल, कॉलेज संचालक के परिजनों पर मुकदमा
देहरादून। जमीन कब्जाने और राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कराने के लिए एक जीवित व्यक्ति को कागजों में मृत दिखाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि फर्जी वसीयत और श्मशान घाट की कथित फर्जी रसीद तैयार कर 0.4050 हेक्टेयर जमीन पर कब्जे की साजिश रची गई। मामले में पैरामेडिकल कॉलेज संचालक के परिवार से जुड़े मां-बेटे समेत तीन लोगों के खिलाफ प्रेमनगर थाना पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया है।
शिकायतकर्ता श्यामलाल निवासी सिमलासग्रांट, डोईवाला के मुताबिक उनके पिता ताराचंद के नाम ईस्ट हॉप टाउन में 0.4050 हेक्टेयर भूमि दर्ज थी। आरोप है कि चंद्रावती निवासी ठाकुरपुर, संजय कुमार चौधरी पुत्र दरियाब सिंह और ओमवती पत्नी दरियाब सिंह निवासी चकराता रोड ने साजिश के तहत भूमि पर कब्जा करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
शिकायत के अनुसार आरोपियों ने तीन अगस्त 1995 की कथित फर्जी वसीयत तैयार की। इसके साथ ही ताराचंद की मृत्यु 14 जून 2002 को होना दर्शाते हुए श्मशान घाट की कथित फर्जी रसीद भी तैयार की गई। जबकि शिकायतकर्ता के अनुसार ताराचंद का वास्तविक निधन 20 नवंबर 2016 को हुआ था।
आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर चंद्रावती ने राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज करा लिया। इसके बाद जमीन का कुछ हिस्सा ओमवती के नाम स्थानांतरित किया गया और बाद में उसे एक सोसाइटी को बेच दिया गया।
श्यामलाल के अनुसार उन्हें 27 जनवरी 2025 को खतौनी निकलवाने के दौरान जमीन में हुए कथित फर्जीवाड़े की जानकारी मिली। इसके बाद जब वह 5 फरवरी 2025 को अपनी जमीन पर पहुंचे तो आरोप है कि उनके साथ मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी दी गई।
मामले में कार्रवाई के लिए उन्होंने पहले प्रेमनगर थाने में 12 जून 2026, क्षेत्राधिकारी प्रेमनगर को 23 जून और एसएसपी देहरादून को 29 जून 2026 को प्रार्थनापत्र दिया। आरोप है कि पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
न्यायालय के आदेश के बाद प्रेमनगर थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के मुताबिक मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच की जाएगी।
पुलिस के सामने अब कथित वसीयत, श्मशान घाट की रसीद, राजस्व अभिलेखों में नामांतरण और जमीन के हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेजों की सत्यता की जांच अहम होगी। मामले में दरियाब सिंह दून पैरामेडिकल कॉलेज के संचालक बताए गए हैं।

