दहशत: नौ घंटे तक अटकी रहीं सांसें, सेना छावनी परिसर में घुसे हाथियों को निकाला बाहर
रुड़की। सेना छावनी में घुसे दोनों हाथियों को बाहर निकालने में नौ घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन गुरुवार तड़के करीब साढ़े चार बजे पूरा हुआ। वन विभाग की एलीफेंट रेस्क्यू ऑपरेशन टीम ने दोनों हाथियों को जौरासी के जंगल तक पहुंचाया। इसके बाद उन्हें पथरी के जंगल की ओर रवाना कर दिया। ऑपरेशन पूरा होने के बाद वन विभाग, सेना और पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली। वन विभाग के अधिकारियों की माने तो ऑपरेशन के दौरान तमाम तहर की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। मंगलवार तड़के करीब चार बजे पथरी जंगल से भटक कर दो हाथी सेना छावनी का गेट तोड़कर अचानक अंदर घुस आए थे। हालांकि दोनों हाथियों ने बिना कोई नुकसान पहुंचाए छावनी के जंगल में डेरा जमा लिया था। जंगली हाथियों के छावनी में आने से हड़कंप की स्थिति रही। वन विभाग के अधिकारी टीमों के साथ मौके पर रहे। सेना के जवान भी हाथियों को लेकर अलर्ट रहे। इस दौरान वहां सके सभी रास्ते बंद रखे गए। मंगलवार देर रात वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने हाथियों को छावनी से बाहर निकाला, लेकिन अचानक ट्रेन आ जाने से हाथी खतरा भांपते हुए वापस छावनी में घुस गए थे। हाथियों को बाहर निकालने के लिए वन विभाग की रेस्क्यू टीम को बुधवार रात को ऑपेरशन शुरू करना था। इसको लेकर तमाम तैयारियां की गई थी, लेकिन दोनों हाथी रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू होने से पहले ही बुधवार देर शाम छावनी से बाहर निकल आए। इस दौरान उन्होंने सेना अस्पताल की दीवार भी तोड़ दी थी। हाथियों को जब वहां से खदेड़ा गया तो वह वापस छावनी में घुस गए। बुधवार देर रात को पूरी तैयारी के साथ वन विभाग के अधिकारियों और बाहर से बुलाई गई विशेष एलीफेंट रेस्क्यू टीम ने फिर से ऑपरेशन शुरू किया। हाथियों को बेहद योजनाबद्ध तरीके से बाहर लाया गया। वन विभाग के एसडीओ सुनील बलोनी ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान तमाम तरह की कठिनाइयां सामने आईं। हाथी अक्रामक न हो, इसके लिए ऑपरेशन को बेहद धीमा चलाया गया। तड़के चार बजे दोनों हाथियों को जौरासी के जंगल लाया गया। यहां से उन्हें पथरी के जंगल की ओर रवाना कर दिया गया। ऑपरेशन पूरा होने पर वन विभाग, सेना व पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। इस दौरान वन विभाग हरिद्वार के डीएफओ पूरे ऑपरेशन में मौजूद रहे।

