सुनवाई: स्कूल-अस्पतालों से आवारा कुत्ते हटाने का आदेश वापस नहीं, पागल कुत्तों को दे सकते हैं इच्छामृत्यु

सुनवाई: स्कूल-अस्पतालों से आवारा कुत्ते हटाने का आदेश वापस नहीं, पागल कुत्तों को दे सकते हैं इच्छामृत्यु
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नईदिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। उसने स्कूलों, अस्पतालों, बस और रेलवे स्टेशन समेत उन सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के नवंबर 2025 के आदेश को भी वापस लेने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कुत्तों के हमलों की घटनाएं सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है, ऐसे में जरूरत पड़ने पर आक्रामक आवारा कुत्तों को इच्छामृत्यु दी जा सकती है।
कोर्ट ने आदेश दिया कि आवारा कुत्तों के हमलों पर अंकुश लगाने के लिए उसके निर्देशों के कार्यान्वयन के लिए अगर कोई अधिकारी का कर रहा है तो उसके खिलाफ कोई एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जाएगी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारी की पीठ ने आदेश दिया कि अगर आवश्यक तो, तो राज्य रेबीज से संक्रमित और लाइलाज माने जाने वाले बीमार, खतरनाक और आक्रामक कुत्तों को इच्छामृत्यु देने में संकोच नहीं करना चाहिए।
कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि देशभर में आवारा कुत्तों के काटने और हमलों की घटनाएं चिंताजनक तरीके से बढ़ रही हैं, लेकिन उसके निर्देशों का जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा, राज्य मूकदर्शक नहीं रह सकता। अदालत उन कठोर जमीनी हकीकतों से अनभिज्ञ नहीं रह सकती जहां बच्चे, अंतरराष्ट्रीय यात्री और बुजुर्ग कुत्ते के काटने की घटनाओं का शिकार हुए हैं। कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा पशुओं को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है।
28 जुलाई 2025 को न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की खंडपीठ ने एक खबर के आधार पर आवारा कुत्तों के मामले का स्वत: संज्ञान लिया और 11 अगस्त को कुत्तों को नसबंदी और आश्रय स्थल भेजने को कहा। फैसले का विरोध हुआ, जिसके बाद 3 न्यायाधीशों की पीठ ने 11 अगस्त के फैसले पर रोक लगा दी। पीठ ने नवंबर 2025 में, स्कूल-अस्पतालों, बस-रेलवे स्टेशनों से कुत्तों को हटाने को कहा और 29 जनवरी 2026 को फैसला सुरक्षित रखा।
कोर्ट की 3 सदस्यीय पीठ ने 7 नवंबर, 2025 को स्कूलों, अस्पतालों, शैक्षणिक परिसरों, खेल परिसरों, रेलवे और बस स्टैंडों जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कुत्तों को टीकाकरण और नसबंदी के बाद इन क्षेत्रों में वापस छोड़ने को मना किया और उन्हें आश्रयों में भेजने को कहा था। उसने पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियमों के संबंध में भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों के लिए ‘पकड़ो-नसबंदी करो-टीकाकरण करो-छोड़ दो’ मॉडल को निलंबित किया था।
प्रत्येक जिले में एक पूर्णत: कार्यरत एबीसी केंद्र की स्थापना हो और कोर्ट के निर्देशों को लागू किया जाए। रेबीज रोधी दवा की पर्याप्त उपलब्धता, राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की समस्या का समाधान और वहां पुराने परिवहन वाहनों की तैनाती करे। एनएचएआई निगरानी और समन्वय ढांचा स्थापित करे। संबंधित अधिकारी कुत्तों से खतरे को कम करने के लिए इच्छामृत्यु देने जैसे कानून अनुमत उपाय कर सकते हैं। नगरपालिका, प्रशासन को उचित संरक्षण प्राप्त होगा और कोई एफआईआर नहीं होगी।

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