एक्शन: वकील से कथित दुर्व्यवहार के आरोपी जज का ट्रांसफर, जुडिशियल एकेडमी से किया अटैच

एक्शन: वकील से कथित दुर्व्यवहार के आरोपी जज का ट्रांसफर, जुडिशियल एकेडमी से किया अटैच
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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में न्यायिक व्यवस्था से जुड़ा एक विवाद तूल पकड़ता जा रहा है. दिल्ली हाई कोर्ट ने रोहिणी कोर्ट में वकील के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपी जज राकेश कुमार पंचम का ट्रांसफर कर दिया. दिल्ली जुडिशियल सर्विस एसोसिएशन ने घटना की निंदा की और नोटिस जारी किया है. हाईकोर्ट के नोटिफिकेशन के मुताबिक जज राकेश कुमार पंचम को दिल्ली जुडिशियल एकेडमी के डायरेक्टर के साथ अटैच कर दिया गया है. इस घटना के विरोध में वकीलों ने हड़ताल शुरू कर दी है. इससे दिल्ली की जिला अदालतों में कामकाज प्रभावित हो गया है.
करीब सभी जिला अदालतों में किसी भी वकील को कोर्ट रुम में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है. इस हड़ताल का आह्वान ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली की को-आर्डिनेशन कमेटी ने किया है. इस हड़ताल का आह्वान ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली की को-आर्डिनेशन कमेटी ने किया है.को-आर्डिनेशन कमेटी के सेक्रेटरी विजय बिश्नोई के हस्ताक्षर से जारी नोटिस में संबंधित जज द्वारा वकील के साथ आपत्तिजनक व्यवहार का विरोध किया गया है.
को-आर्डिनेशन कमेटी ने संबंधित जज के व्यवहार की जांच करने की मांग की है. दरअसल 16 मई को रोहिणी कोर्ट में जज राकेश कुमार पंचम की कोर्ट में एक मामले में सुनवाई के दौरान रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव कुमार तेहलान ने पास ओवर (मामले को बाद में सुनने का आग्रह) किया. जज ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया. जिसके बाद कुछ और वकील भी आ गए और जज और वकीलों के बीच तेज बहस होने लगी. हालात इतने बिगड़ गए कि वकील समुदाय ने इसे घोर न्यायिक कदाचार बताते हुए आरोप लगाया कि जज ने गंदी गालियों और अपमानजनक तू-तड़ाक वाली भाषा का इस्तेमाल किया. वकीलों ने पूरे मामले की औपचारिक शिकायत दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के पास दर्ज कराई. इसके बाद बार अध्यक्ष ने जज की तत्काल मेडिकल जांच की मांग की.
दिल्ली जुडिशियल सर्विस एसोसिएशन ने रोहिणी कोर्ट की घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग करने और उसके वायरल करने की आलोचना की और वीडियो को सभी प्लेटफार्म से हटाने की मांग की है. एसोसिएशन ने रोहिणी कोर्ट के जज राकेश कुमार पंचम के साथ खड़े रहने की बात कही है.
दिल्ली जुडिशियल सर्विस एसोसिएशन के सेक्रेटरी देवेंदर कुमार जांगला और अध्यक्ष शेफाली बरनाला टंडन के हस्ताक्षर से जारी नोटिस में इस घटना की निंदा की गई और इस पूरे मामले को न्यायपालिका की गरिमा पर हमला करार दिया है. इसमें दिल्ली के वकीलों की ओर से किए जा रहे न्यायिक कार्यों के बहिष्कार की भी आलोचना की है. एसोसिएशन ने वकीलों के न्यायिक कार्यों के बहिष्कार को सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और दिशानिर्देशों का उल्लंघन बताया है. दिल्ली जुडिशियल सर्विस एसोसिएशन ने कहा है कि इससे न्याय वितरण व्यवस्था पर असर पड़ेगा. नोटिस में कहा गया है कि कुछ वकीलों का व्यवहार जजों को धमकाने वाला होता है. ऐसा कानून के शासन वाले लोकतांत्रिक देश में अस्वीकार्य है.

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