उम्मीद: पीएम के आगमन से लोगों में जगी है उम्मीद, शुरू हो सकता है कैलाश मानसरोवर का प्राचीन मार्ग

उम्मीद: पीएम के आगमन से लोगों में जगी है उम्मीद, शुरू हो सकता है कैलाश मानसरोवर का प्राचीन मार्ग
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देहरादून। पीएम मोदी के पिथौरागढ़  दौरे के दौरान गुंजी गांव के लोगों के बीच पहुंचने से  गढ़वाल मंडल के सीमांत क्षेत्र के लोगों में कैलाश मानसरोवर के प्राचीन मार्ग के आबाद होने की उम्मीद जगी है। उन्हें यह आस है कि अब उनकी छह दशक पुरानी मांग सुनी जाएगी। दरअसल, नीतिघाटी मार्ग से वर्ष 1954 तक कैलाश मानसरोवर यात्रा की जाती थी किन्तु 1962 में भारत- चीन युद्ध के बाद यहां के व्यापारियों का न केवल व्यापारिक संबंध समाप्त हुआ बल्कि मानसरोवर यात्रा भी बंद हो गई। उसके बाद 1981 से भारतीय विदेश मंत्रालय व चीन सरकार के सहयोग से कुमाऊं मंडल विकास निगम यात्रा को संचालित करता है। कैलाश मानसरोवर यात्रा लिपुलेख दर्रे से होकर जाती है। इस ट्रैक की कुल दूरी दिल्ली से करीब 835 किमी है जिसे 32 दिनों में पूरा किया जाता है।
चमोली जिले की नीति-माणा घाटी से मानसरोवर की यात्रा दो मार्गों से की जाती है। पहला नीति से ग्यालढांग होते हुए। इसमें करीब 10 पड़ाव हैं। नीति से कैलाश परिक्रमा पथ की दूरी करीब 110 किमी है। दूसरा मार्ग नीति से सुमना-रिमखिम-शिवचिलम होते हुए है जिसकी दूरी करीब 100 किमी है। माणापास से तोथिला से थैलिंगमठ होते हुए मानसरोवर जाया जा सकता है। गौरतलब है कि नीति और मलारीघाटी के लोग घाटी से मानसरोवर यात्रा शुरू करने और सीमा दर्शन की मांग को लेकर गत वर्ष प्रधानमंत्री को माणा गांव के दौरे के दौरान ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।

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