अनूठा प्रयास: यहां पिरुल और रिंगाल से तैयार की जा रही हैं अनोखी राखियां, बाजार में बढ़ रही है डिमांड
उत्तरकाशी। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। जनपद उत्तरकाशी में इन दिनों स्थानीय वनस्पतियों से राखियां तैयार की जा रही हैं, जिनकी खासी अच्छी मांग बाजार में है। जनपद के पुरोला, नौगांव और डुंडा में पिरुल और रिंगाल से राखियां तैयार की जा रही हैं, जिन्हें विभिन्न स्टालों के जरिए बेचा जा रहा है। साथ ही राखियों को मुख्यमंत्री सहित विभिन्न प्रदेश के अधिकारियों और नेताओं को भी भेजा गया है।
ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना के जरिये बाजार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। अभी तक महिलाएं 1.50 लाख रुपये की राखी बेच चुकी हैं। जनपद के पुरोला, नौगांव और डुंडा में महिलाएं चीड़ के पिरूल से खास तरह की सुंदर राखी तैयार कर रही हैं। ये महिलाएं अपने चौका-चूल्हा, खेत खलिहान का कार्य निपटाने के साथ-साथ एक दिन में पांच सौ से अधिक राखियां तैयार कर रही हैं।

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डोडेश्वर महादेव, जागमाता महिला समूह, स्वयं सहायता समूह एवं संसाधन समिति पिरुल से विभिन्न प्रकार की टोकरियां, शोपीस, सूप एवं झालर आदि तैयार कर देहरादून आदि विभिन्न स्थानों पर आयोजित मेलों में पहुंचा रही हैं। इन महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर स्वरोजगार की दिशा में अनुकरणीय प्रयास किया है। पिछले कुछ दिनों से इन महिलाओं ने पिरुल से राखियां तैयार करनी शुरू की हैं।
डाडेश्वर महादेव व जागमाता महिला समूह पुरोला की महिलाओं की ओर से पिरूल से तैयार रंग-बिरंगी राखियों का स्टॉल देहरादून परेड ग्राउंड में भी लगा हुआ है,जिसका मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निरीक्षण किया तथा खूब सराह। महिला स्वयं सहायता समूह एवं संसाधन समिति की लक्ष्मी देवी ने कहा कि पुरोला में उनके संगठन ने एक हजार से अधिक राखियां बेच दी हैं।
एक राखी की कीमत 35 रुपये है। जिला प्रशासन की ओर से 250 राखियों की डिमांड की गई। 350 राखियों की डिमांड देहरादून से भेजी गई है। स्थानीय बाजार में राखी को बेचने के लिए सरकारी स्तर से भी प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना उत्तरकाशी के सहयोग से प्रत्येक ब्लाक मुख्यालय पर स्टॉल लगाए गए हैं। ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना महिलाओं को पूरा सहयोग कर रही है, जिसमें मार्केटिंग और डिजाइनिंग में सहयोग किया गया है। पुरोला, नौगांव और डुंडा की महिलाओं ने राखियां तैयार कर करीब तीन हजार राखियां बेच दी हैं।

