सामयिक: आवेग व प्रतिरोध की अशोभनीय परिणति

सामयिक: आवेग व प्रतिरोध की अशोभनीय परिणति
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फिल्म अभिनेत्री से नेता बनी कंगना रानावत को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर महिला कांस्टेबल ने कथित तौर पर थप्पड़ मार दिया। सीआईएसएफ की यह कांस्टेबल कुलविंदर कौर दो साल से यहां तैनात है। कोैर को फौरन गिरफ्तार कर सस्पेंड कर दिया गया। कंगना मंडी से भाजपा की सांसद चुनी गई हैं। वह संसदीय दल की बैठक में हिस्सा लेने दिल्ली आ रही थीं।
सांसद द्वारा जारी वीडियो में कहा गया कि थप्पड़ मारने वाली किसान आंदोलन की समर्थक थी। उसने सामने से चेहरे पर मारा और अपशब्द कहने लगी, जबकि फौरन कपूरथला की कौर का वीडियो भी सोशल मीडिया में आया, जिसमें वह कंगना पर आरोप लगा रही है कि ‘उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान धरने पर बैठी महिलाओं को कहा था कि ऐसी महिलाएं सौ-सौ रुपए में उपलब्ध हो जाती हैं, उस वक्त धरने पर बैठी महिलाओं में कौर की मां भी शामिल थी।’ निश्चित रूप से कंगना का वह कथित बयान शर्मनाक और अपमानजनक था। अगर पीएम या भाजपा के किसी बड़े नेता ने उसी वक्त कंगना को ऐसी भद्दी टिप्पणी के लिए फटकार लगा दी होती तो कौर जैसी किसान बेटियों की तात्कालिक नाराज़गी प्रतिशोध की इस विवादित परिणति तक नहीं पहुंच पाती और देश को ऐसी अप्रिय घटना को लेकर शर्मिंदगी की स्थिति से नहीं गुजरना पड़ता।

चिंताजनक बात तो यह है कि इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया में कंगना ने एक नये विवाद को खड़ा कर उसे राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का प्रयास किया है।
कंगना अपने वीडियो में कह रही हैं कि पंजाब में आतंकवाद व उग्रवाद बढ़ रहा है, उसे हम कैसे हैंडल करेंगे ? सुरक्षाकर्मी का यह बर्ताव असंवैधानिक व दुर्भाग्यपूर्ण है। आंदोलन करना या उसके खिलाफ बयान देना, निजी मसला है, जिसका संवैधानिक तरीके से विरोध किया जाना चाहिए, परंतु जिस तरह का आवेग व प्रतिरोध कौर ने जनप्रतिनिधि के प्रति दर्शाया, वह किसी भी लिहाज से उचित नहीं ठहराया जा सकता है। इससे भी गंभीर बात यह है कि यह भविष्य में सुरक्षाबलों पर संदेह उपजाने वाला साबित हो सकता है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा लाए कृषि कानूनों को लेकर 2020-2021 के दरम्यान किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया था। उस वक्त भी कंगना ने अपने ट्वीट पर विवाद होते ही, उसे डिलिट कर दिया था। मगर कौर के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने एकबार फिर समूचे पंजाब को आतंकवाद व उग्रवाद की तरफ बढ़ता बता कर, जल्दबाजी दिखा दी। यह सांप्रदायिक विभाजन की लकीर खींचने सरीखा है।
देश के तमाम लोग सुरक्षाकर्मी के पक्ष में भी आ खड़े हुए। उन्होंने सोशल मीडिया में किसानों, पंजाबवासियों व आंदोलनकारियों की पक्षधरता में कोई संकोच नहीं किया। चूंकि अब कंगना मात्र फिल्मकार नहीं हैं, उन्हें जनता ने चुन कर संसद तक पहुंचाया है। इसलिए उनका हर बयान गंभीर व तथ्यपरक होना चाहिए। उनके साथ जो अभद्रता हुई, वह गलत है मगर समुदाय विशेष, राज्य या जाति पर बंटवांरा करके उसे गलत ठहराना उचित नहीं कहा जा सकता। जांच चालू है, शीघ्र ही उचित कार्रवाई का नतीजा सबके सामने होगा।

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