मूल्यवृद्धि: 15 दिन में 17 रुपये महंगी हुई चीनी, गुड़-मिश्री के दाम भी उछले

मूल्यवृद्धि: 15 दिन में 17 रुपये महंगी हुई चीनी, गुड़-मिश्री के दाम भी उछले
Spread the love
देहरादून। रसोई में जायके की मिठास घोलने वाली चीनी ने इस बार लोगों की जेब का स्वाद कसैला कर दिया है। चीनी की कीमतों में पिछले 15 दिनों में जबरदस्त उछाल आया है। फुटकर बाजार में चीनी का भाव 45 रुपये से बढ़कर 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। यानी महज 15 दिन में चीनी करीब 25  रुपये प्रति किलो महंगी हो गई है। इसी के साथ गुड़ और मिश्री के दामों में भी 20 से 30 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है।
 किराना कारोबारी कमल कुमार  के मुताबिक, पांच अगस्त के आसपास चीनी 45 से 46 रुपये किलो बिक रही थी। बुधवार को यही चीनी 61 से 62 रुपये किलो तक पहुंच गई। इसी तरह गुड़ के दाम 50 रुपये से बढ़कर करीब 80 रुपये किलो हो गए हैं। मिश्री भी 50 रुपये से बढ़कर 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं के साथ ही किराना कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है।
 कारोबारी रोहित गर्ग ने बताया कि बुधवार को मंडी में चीनी का थोक भाव करीब 58 रुपये प्रति किलो रहा। उनका कहना है कि बाजार में चीनी की आपूर्ति कम होने की चर्चाओं के बीच कीमतों में और तेजी आने की आशंका बनी हुई है। यदि सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में फुटकर बाजार में इसका असर और अधिक दिखाई दे सकता है।
कारोबारियों के अनुसार, शुगर मिलों के एजेंटों की ओर से उन्हें गन्ने की कम आवक की जानकारी दी जा रही है। इसके चलते चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं होने की बात कही जा रही है। नई फसल आने में अभी करीब तीन महीने का समय बताया जा रहा है। ऐसे में मौजूदा स्टॉक पर दबाव बढ़ने से कीमतों में तेजी का असर बाजार में दिखाई दे रहा है। कुछ कारोबारी चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे गन्ने के एक हिस्से का एथेनॉल उत्पादन की ओर जाने को भी एक कारण मान रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में बाजार में अलग-अलग तरह के अनुमान हैं। कारोबारियों का कहना है कि उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक के बीच संतुलन बिगड़ने पर कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। चीनी के दामों में हुई इस तेजी का असर केवल घरेलू रसोई तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। चाय-कॉफी, मिठाई, बेकरी उत्पाद, चॉकलेट, शीतल पेय और चीनी का इस्तेमाल करने वाले अन्य खाद्य पदार्थों की लागत बढ़ सकती है। खासकर त्योहारों का सीजन शुरू होने के साथ मिठाई कारोबारियों पर लागत का दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है। कारोबारियों के मुताबिक, यदि चीनी के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी की नौबत आ सकती है। इसका सीधा असर त्योहारों के दौरान खरीदारी करने वाले आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
चीनी महंगी होने के बावजूद शहर के मिठाई विक्रेताओं ने फिलहाल अपने उत्पादों के दाम नहीं बढ़ाए हैं। डीपी नानक स्वीट्स के संचालक आदित्य गुप्ता ने बताया कि अभी ग्राहकों पर बढ़ी हुई लागत का बोझ नहीं डाला जा रहा है। हालांकि, यदि चीनी की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो भविष्य में कीमतों की समीक्षा करनी पड़ सकती है। कमल स्वीट्स के संचालक कमल सिंह मेहरा ने भी बताया कि फिलहाल मिठाइयों के दाम बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं है। त्योहारों के दौरान ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसका ध्यान रखा जा रहा है। हालांकि, कच्चे माल की लागत लगातार बढ़ती रही तो आगे कीमतों में बदलाव की स्थिति बन सकती है।

Parvatanchal