दुष्प्रभाव: रील और चैटिंग में व्यस्त जेन-जी, साइबर कैफे के भरोसे छोड़ा प्रवेश तो बिगड़ गया रिकॉर्ड
देहरादून। स्मार्टफोन पर चैटिंग, सोशल मीडिया और रील देखने में व्यस्त रहने वाले जेन-जी के कई स्नातक विद्यार्थी ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के दौरान अपना फार्म तक खुद नहीं भर पा रहे हैं। ऑनलाइन आवेदन की जानकारी और प्रक्रिया से अनजान होने के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी साइबर कैफे संचालकों का सहारा ले रहे हैं। यही लापरवाही अब विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज में ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के दौरान 150 से अधिक विद्यार्थियों के रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं।
किसी विद्यार्थी के माता-पिता की जानकारी गलत दर्ज कर दी गई तो किसी के दस्तावेज में ही फेरबदल कर दिया गया। एक छात्र के रिकॉर्ड में उसके जिंदा पिता को मृत दर्ज कर दिया गया। कुछ छात्राओं के आवेदन में उनकी मूल फोटो की जगह किसी अन्य महिला की तस्वीर अपलोड कर दी गई। इतना ही नहीं, कई विद्यार्थियों के आधार कार्ड में भी फोटो बदले जाने की शिकायत सामने आई है। कॉलेज प्रशासन की ओर से समर्थ पोर्टल पर आइडी कार्ड जारी किए जाने के बाद इन गड़बड़ियों का खुलासा हुआ।
आइडी कार्ड हाथ में आने के बाद विद्यार्थियों ने जब उसमें दर्ज अपना नाम, फोटो, माता-पिता का विवरण और अन्य जानकारी देखी तो वे भी हैरान रह गए। कई विद्यार्थियों ने तत्काल कॉलेज प्रशासन से संपर्क कर रिकॉर्ड ठीक कराने की मांग की। मामले सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन को अब विद्यार्थियों के ऑनलाइन रिकॉर्ड का उनके मूल दस्तावेजों से दोबारा मिलान करना पड़ रहा है।
एमबीपीजी कॉलेज में स्नातक प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद समर्थ पोर्टल से आइडी कार्ड जनरेट किए गए। विद्यार्थियों को जब परिचय पत्र मिले तो उनमें कई तरह की विसंगतियां दिखाई दीं। इसके बाद एक-एक कर विद्यार्थी कॉलेज प्रशासन के पास पहुंचने लगे। किसी छात्र की फोटो गलत थी तो किसी के अभिभावक का विवरण बदल गया था। कई मामलों में आधार और अन्य पहचान संबंधी जानकारी में भी अंतर पाया गया। सबसे गंभीर मामला तब सामने आया जब एक विद्यार्थी के ऑनलाइन रिकॉर्ड में उसके जीवित पिता को मृत दर्शा दिया गया। कुछ छात्राओं के आवेदन में उनकी फोटो के स्थान पर किसी दूसरी महिला की तस्वीर अपलोड होने से कॉलेज कर्मचारियों के सामने भी स्थिति असहज हो गई। विद्यार्थियों की शिकायतें बढ़ने के बाद कॉलेज प्रशासन ने रिकॉर्ड की जांच शुरू की। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए विद्यार्थियों की अपार (APAAR) आइडी और एबीसी आइडी महत्वपूर्ण हैं। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने इस वर्ष स्नातक विद्यार्थियों के प्रवेश सत्यापन की प्रक्रिया में अपार आइडी को आवश्यक किया है।
एमबीपीजी कॉलेज के ऑनलाइन प्रवेश फार्म में भी अपार आइडी दर्ज करने का विकल्प दिया गया था। अपार आइडी दर्ज किए बिना आवेदन आगे नहीं बढ़ रहा था। ऐसे में जिन विद्यार्थियों को अपनी अपार या एबीसी आइडी की जानकारी नहीं थी, उन्होंने साइबर कैफे संचालकों की मदद ली। आरोप है कि कुछ कैफे संचालकों ने अपार या एबीसी आइडी की जगह विद्यार्थियों के आधार नंबर दर्ज कर दिए। इससे ऑनलाइन रिकॉर्ड में गलत जानकारी चली गई। अब प्रवेश सत्यापन और विद्यार्थियों के रिकॉर्ड को अपडेट करने में कॉलेज प्रशासन को परेशानी उठानी पड़ रही है। ऑनलाइन प्रवेश फार्म में विद्यार्थी की फोटो और पहचान संबंधी दस्तावेज सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसके बावजूद कुछ मामलों में छात्राओं की फोटो की जगह दूसरी महिला की तस्वीर अपलोड किए जाने की बात सामने आई है। कई विद्यार्थियों ने यह भी शिकायत की कि उनके आधार कार्ड में लगी फोटो और ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज फोटो अलग है। यदि दस्तावेजों के साथ इस तरह की छेड़छाड़ साइबर कैफे से की गई है तो यह महज सामान्य ऑनलाइन आवेदन की गलती नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के पहचान संबंधी रिकॉर्ड की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बन जाता है।
एक साथ बड़ी संख्या में रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन के सामने अब विद्यार्थियों के रिकॉर्ड को दुरुस्त करने की चुनौती है। कॉलेज कर्मचारियों को विद्यार्थियों के मूल आधार कार्ड, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट प्रमाणपत्र सहित अन्य दस्तावेजों से ऑनलाइन रिकॉर्ड का मिलान करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों को भी अपने आइडी कार्ड और ऑनलाइन रिकॉर्ड की जानकारी ध्यान से जांचने की सलाह दी जा रही है, ताकि भविष्य में परीक्षा फार्म, छात्रवृत्ति, रिजल्ट, डिग्री अथवा अन्य शैक्षणिक दस्तावेज तैयार होने के दौरान परेशानी न हो। ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया में विद्यार्थियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी खुद आवेदन करने के बजाय साइबर कैफे पहुंच जाते हैं। वहां संचालक जल्दबाजी में फार्म भरते हैं और कई बार विद्यार्थी भी अंतिम रूप से फार्म में दर्ज जानकारी को पढ़े बिना ही आवेदन जमा कर देते हैं।
यही कारण है कि गलत जानकारी दर्ज होने के बाद उसका पता तब चलता है, जब कॉलेज की ओर से आइडी कार्ड या अन्य दस्तावेज जारी कर दिए जाते हैं। विद्यार्थियों को आवेदन जमा करने से पहले अपने नाम, जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, फोटो, आधार नंबर, अपार आइडी और अन्य सभी जानकारियों की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए।
150 से अधिक विद्यार्थियों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आने से कॉलेज के प्राध्यापक और कर्मचारी भी हैरान हैं। कॉलेज प्रशासन के लिए यह महज एक-दो विद्यार्थियों के फार्म में हुई गलती का मामला नहीं है। इतनी बड़ी संख्या में रिकॉर्ड में त्रुटियां सामने आने से ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया में साइबर कैफे संचालकों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। कॉलेज प्रशासन अब विद्यार्थियों के रिकॉर्ड को सही करने के साथ ही यह भी देख रहा है कि गड़बड़ियां किस स्तर पर हुईं और इनमें विद्यार्थियों की गलती कितनी है तथा साइबर कैफे संचालकों की लापरवाही कितनी। एमबीपीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एनएस बनकोटी ने बताया कि स्नातक प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश ले चुके विद्यार्थियों के आइडी कार्ड जनरेट कर दिए गए हैं। आवेदन के दौरान छात्र-छात्राओं की ओर से त्रुटि किए जाने के कुछ मामले सामने आए हैं। इन मामलों की जांच के बाद उन्हें सुधारा जा रहा है।
विद्यार्थियों के ऑनलाइन रिकॉर्ड में छोटी सी गलती भी आगे चलकर बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है। नाम या जन्मतिथि में अंतर होने पर परीक्षा और रिजल्ट प्रभावित हो सकता है। अभिभावक की जानकारी गलत होने पर छात्रवृत्ति अथवा अन्य सरकारी योजनाओं में दिक्कत आ सकती है। वहीं अपार और एबीसी आइडी में गलत जानकारी दर्ज होने से विद्यार्थी के डिजिटल शैक्षणिक रिकॉर्ड को अपडेट करने में समस्या आ सकती है। ऐसे में कॉलेज प्रशासन की ओर से विद्यार्थियों के रिकॉर्ड की जांच और सुधार जरूरी है। साथ ही विद्यार्थियों को भी ऑनलाइन आवेदन के दौरान किसी अन्य व्यक्ति पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय फार्म में भरी गई प्रत्येक जानकारी को स्वयं जांचने की आदत डालनी होगी। अब सवाल यह है कि जब ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया में विद्यार्थियों के आधार, फोटो, अभिभावकों की जानकारी और शैक्षणिक रिकॉर्ड जैसी संवेदनशील जानकारियां दर्ज की जा रही हैं तो इतनी बड़ी संख्या में गलतियां आखिर कैसे हुईं? कॉलेज प्रशासन द्वारा रिकॉर्ड की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन गड़बड़ियों के पीछे विद्यार्थियों की लापरवाही थी या साइबर कैफे संचालकों की।

