बजट सत्र: परंपरागत कृषि के सवाल पर जवाब नहीं दे पाए कृषि मंत्री गणेश जोशी, स्थगित करना पड़ा प्रश्न

बजट सत्र: परंपरागत कृषि के सवाल पर जवाब नहीं दे पाए कृषि मंत्री गणेश जोशी, स्थगित करना पड़ा प्रश्न
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देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा में बजट सत्र में शुक्रवार को उस समय अजीब-ओ-गरीब स्थित पैदा हो गयी, जब कृषि मंत्री सत्ता और विपक्ष के विधायकों के खेती को लेकर सवाल पर फंस गए। हालत ये हो गई कि मंत्री से जवाब देते नहीं बना और उन्हें झेंपना पड़ गया। इतना ही नहीं, उनसे पूछा गया प्रश्न भी स्थगित करना पड़ा। इस पर विपक्षी कांग्रेसी विधायकों ने गणेश जोशी पर काफी तंज कसे। जानकारी के अभाव के चलते कृषि मंत्री गणेश जोशी को विपक्ष के साथ ही सत्ता पक्ष के विधायकों के सवालों पर जवाब न दे पाने के कारण झेंपना पड़ा।
दरअसल, कृषि मंत्री प्राकृतिक और परंपरागत खेती के अंतर को नहीं समझा पाए। कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने सवाल किया कि, राज्य के किन जनपदों में प्राकृतिक खेती हो रही है। कृषि मंत्री बताएं कि अभी तक कितना उत्पादन हुआ। इस पर कृषि मंत्री ने कहा कि पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली में एक हजार हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती की जा रही है। कृषि मंत्री के जवाब से सत्ता व विपक्ष के सदस्य संतुष्ट नजर नहीं आये। प्राकृतिक और परंपरागत खेती में फर्क को लेकर कृषि मंत्री गणेश जोशी फंस गए। काफी देर तक बहस और मखौल उड़ने के बाद कृषि मंत्री का प्रश्न स्थगित किया गया। इस सत्र में ये पहला ऐसा मामला नहीं है जब मंत्री जवाब नहीं पाए और प्रश्न स्थगित करना पड़ा। सत्ता पक्ष के विधायक बृजभूषण गैरोला ने भी ये सवाल उठाया था। सत्ता पक्ष के विधायक के सवाल को विपक्ष ने लपका और कृषि मंत्री को घेर लिया।
कृषि मंत्री गणेश जोशी यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि प्राकृतिक खेती में रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। पारंपरिक खेती में रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है। प्राकृतिक खेती, प्रकृति के चक्र पर आधारित होती है। पारंपरिक खेती में किसानों को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। प्राकृतिक खेती प्रकृति के चक्र के अनुसार होती है। पारंपरिक खेती में सिंथेटिक उर्वरक, कीटनाशक का इस्तेमाल किया जाता है। प्राकृतिक खेती में प्रदूषण और ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन कम होता है। पारंपरिक खेती में ग्रीनहाउस गैसें बढ़ती हैं और जल प्रदूषण होता है।

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