फलों का राजा: भारत का आम नवाबी जुनून का प्रतीक रहा है, जो इसे खास बनाता है
अजय दीक्षित
सन 1811में पुर्तगाली कमांडर अल्फांसो ने आम की एक किस्म रत्नागिरी जिले के जंगलों देखी और उसने उस आम के किस्म क्राफ्टिंग की तो जो आम पेड़ पर लगा उसे अल्फांसो नाम दिया गया। अंतराष्ट्रीय मार्केट में इस आम की कीमत 3000रुपए प्रति किलो तक बिकती है। लेकिन भारत में आम की उपस्थिति 6000 साल से है क्योंकि महाभारत काल में इसका उल्लेख है। बताया जाता है कि ईसा से 600 वर्ष पहले भगवान बुद्ध को एक युवती ने आम का बगीचा भेंट किया था और बुद्ध ने उसे आम्रपाली नाम दिया। मुगल शासन में अबु फ़सल ने लिखा था कि सलीम लंगड़े पर मत रो वह भी खास होकर आम है। इस तरह लंगड़ा भी आम की एक किस्म है । इंस्टीट्यूट ऑफ पाइलियों बॉटनी लखनऊ के प्रोफेसर पंत कहते हैं कि भारत में आम की उत्पत्ति का इतिहास बहुत पुराना है लेकिन मुगल शासन में आम को खूब संरक्षण मिला । उत्तर प्रदेश का मलीहाबादी , लखनवी, बनारसी, आम सुप्रसिद्ध है। दशहरी गांव से चला आम आज पूरे भारत का सबसे अधिक उत्पादन वाली आम की किस्म है। भारत में टोटपरी, दशहरी,लंगड़ा, केसर,बादाम,फाजली और मुगल बादशाह हुमायूं का चौसा, सफेदा, अल्फांसो, हापुश सहित अनेक किस्मों के आम पाए जाते हैं। आम से आमरस, आमचूर, मेंगोसेक, आम पापड़ बनाए जाते हैं। आम का आचार इस पद्धति का उपयोग सारे भारत में किया जाता है।
बताया जाता है कि ब्रिटिश सरकार ने भारत के आम को पहले इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड और मिडिल ईस्ट में पहुंचा दिया था।
भारत में लखनऊ और दक्षिण भारत विजयवाड़ा बहुत बड़े आम केंद्र हैं। असम, पश्चिमी बंगाल, कर्नाटक भी आम की अनेक किस्मों का उत्पादन करते हैं। यहां पर पूरे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल व तेलंगाना से आम आते हैं। भारत संसार का सबसे बड़ा आम उत्पादन (3 0 लाख मैट्रिक टन) वाला देश है। इसके अलावा आम की एक किस्म भारत के हर जिले में होती है जो स्थानीय स्तर पर बिकती है, अचार डाला जाता है और तो और औषधि में भी उपयोग किया जाता है।
उत्तर प्रदेश में मेरठ, मुजफ़्फरनगर, हापुड़, सीतापुर, मलिहाबाद, लखनऊ व बाराबंकी सहित कई जिले आम निर्यात भी करते हैं। एक बार शाहजहां ने दख्खन के नबाब औरंगजेब को इसलिए बंदी बनाया था कि उसने हैदराबादी, हापुस आम दिल्ली नहीं भेजे थे। भारत में आम उत्पादन में लखनऊ के नवाबों ने खासी दिलचस्पी ली। वे प्रति वर्ष आम उत्पादन से जुड़े लोगों की प्रतियोगिता कराते थे और सम्मानित भी करते थे। लखनऊ के अंतिम नबाब वाजिद अली शाह के बारे में वाइस राव वारिंग हेस्टिंग को यह शिकायत दर्ज कराई गई कि बादशाह आम और आम्रपाली के साथ ही रहता है
सनातन धर्म में आम के पेड़ का विशेष महत्व है। हवन में आम की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। शुभ कार्यों में बंदनवार में आम के पत्ते बांधे जाते हैं। आजादी के बाद कृषि वैज्ञानिकों ने आम की विभिन्न किस्मों को उन्नतशील बनाया। काश्तकारों को प्रशिक्षण भी दिया गया। पेस्टिसाइज के उपयोग भी हुए। पंत विश्वविद्यालय ने आम की खेती को व्यवसाय बनाया। बताते हैं कि मलिहाबाद में एक पेड़ में छह टन आम उत्पादन होता है,जो राष्ट्रिय औसत से अधिक है।
हिमालय की तराई वाले क्षेत्र हरिद्वार, रुड़की, बिजनौर, मुजफ़्फरनगर, मेरठ, हापुड़, अलीगढ़ व मोदीनगर में आम की अच्छी खासी खेती होती है। आधे जून,जुलाई में आम की आवक अधिकतम होती है। अब तो इन आमों को कोल्डस्टोरेज में भी रखा जाता है। भारत, पाकिस्तान आम के सबसे बड़े निर्यातक देश हैं।
( ये लेखक के अपने विचार हैं)

