संकट: टमाटर के गिरते दामों से किसानों के लिए लागत निकालना भी हुआ मुश्किल

संकट: टमाटर के गिरते दामों से किसानों के लिए लागत निकालना भी हुआ मुश्किल
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विकासनगर(आरएनएस)। क्षेत्र के किसान इन दिनों अपनी कड़ी मेहनत की कमाई को मंडियों तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें जो दाम मिल रहे हैं, वे उनकी उम्मीदों पर भारी पड़ रहे हैं। टमाटर के भाव में आई भारी गिरावट से क्षेत्र के किसान हताश और निराश नजर आ रहे हैं। उन्हें अब अपनी लागत वसूलने की चिंता सताने लगी है। साहिया क्षेत्र में पारंपरिक फसलों के साथ-साथ टमाटर, हरा धनिया, हरी मिर्च और बींस जैसी नकदी फसलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। स्थानीय किसान सरदार सिंह तोमर, प्रताप सिंह पंवार, अर्जुन सिंह तोमर, नारायण सिंह और भाव सिंह आदि का कहना है कि उन्होंने टमाटर की फसल के लिए पिछले चार माह से दिन-रात मेहनत की है। किसानों ने बताया कि पिछले सप्ताह पहले तक टमाटर 20 से 25 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, लेकिन रविवार को साहिया मंडी में इसके दाम अचानक गिरकर मात्र 8 से 12 रुपये प्रति किलो पर सिमट गए। किसानों का दर्द साझा करते हुए उन्होंने कहा कि इस भाव में बीज, खाद और कीटनाशक दवाओं का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। वहीं साहिया मंडी के आढ़तियों का कहना है कि दामों में यह गिरावट बाजार के गणित के कारण है। मंडी अध्यक्ष राजेश जैन, मनोज पंवार, राजीव गर्ग, सुशील कुमार अग्रवाल, मनोज गुप्ता और सुरजीत सिंह आदि ने बताया कि वर्तमान में हरियाणा, दिल्ली, सहारनपुर और बेंगलुरु की मंडियों में भारी मात्रा में बैंगलोर का टमाटर पहुंच रहा है। आवक अधिक होने के कारण स्थानीय टमाटर के दामों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। लगातार गिरते दामों से किसानों का मनोबल टूट रहा है। लागत से भी कम भाव मिलने के कारण किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।
जंगली सुअरों के फसलों को बचाने के लिए डीएफओ से लगाई गुहार
उधर, कालसी भेड़ बकरी किसान उत्पादक संगठन ने डीएफओ चकराता को ज्ञापन प्रेषित कर कालसी ब्लाक के कई गांवो में जंगली सुअरों से फसलों के नुकसान को बचाने के लिए सुरक्षात्मक उपाय कराए जाने की मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि कालसी प्रखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम मटियावा, दोहा, झुसोऊ, बड़ोडा, दोऊ समेत आसपास के गांवो में जंगली सुअरों द्वारा पिछले कुछ समय से उनकी मक्का, राजमा, खीरा, गोभी, मटर, टमाटर आदि की फसलों को भारी क्षति पहुंचाई जा रही है। जिसके चलते किसानों को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है। बताया कि पूरा दिन ग्रामीण अपने खेतों की देखभाल करते हैं लेकिन रात के समय सुअर खेतों में घुसकर उनकी फसलों को तहस नहस कर देते हैं।विभाग को गत वर्ष भी इस समस्या से अवगत कराया गया था, लेकिन इस ओर कोई कार्यवाही नहीं की गयी। जिस कारण अनेक किसानों द्वारा इस बार फसल की बुआई नहीं की गई। बताया कि इस नुकसान के चलते लोग परेशान हैं और खेती छोड़ने पर विचार कर रहे हैं। कहा कि यदि गांव में रहने वाले ग्रामीण किसानी छोड़ देंगे तो यह पलायन का बड़ा कारण बनेगा। ज्ञापन सौंपने वालों में समिति की अध्यक्ष मानसी चौहान, संजीव चौहान, रमेश चौहान, ईश्वर चौहान, सुरेंद्र चौहान, गोपाल दास, धीरेंद्र सिह आदि शामिल रहे।

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