आतंक: खेती को नुक़सान पहुंचा रहे हैं जंगली जानवर, किसानों ने लगाई बचाने की गुहार
नई टिहरी। नरेंद्रनगर विधानसभा के कई गांवों में जंगली जानवर खेती को नष्ट कर किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। जिससे किसानों में निराशा बनी हुई है। उन्होंने शासन-प्रशासन से खेती को जंगली जानवरों के नुकसान से बचाने के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की है। दोगी पट्टी के ग्राम मजियाडी निवासी 70 वर्षीय किसान कुंवर सिंह और मंगसीर सिंह ने बताया कि जंगली सुअरों ने एक ही रात में उनकी चार माह की मेहनत पर पानी फेर दिया। उनके खेतों में अदरक,मक्का,धनिया सहित अन्य सब्जियों को फसल तैयार हो चुकी थी। लेकिन सुअर झुंड में खेतों को बर्बाद कर रहे हैं। बताया कि खेती उनकी आर्थिकी का जरिया है। बताया कि उन्होंने 5 कुंतल अदरक का बीज बाजार से 80 रुपये प्रति किलो के भाव लिया था। अपने चार खेतों में अदरक लगाया। कुछ खेतों में मक्का और धनिया का उत्पादन कर रहे थे। लेकिन लहलहाती फसल को सुअरों ने तहस-नहस कर दिया। वन विभाग को भी अवगत कराया है। लेकिन फसलों के मुआवजा का कोई आश्वासन नहीं मिला। मजियाडी के जयपाल सिंह,राहुल सिंह, ओंकार सिंह, सुरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह रावत, रमेश सिंह, भगवान सिंह, पूर्णा देवी का कहना है कि गांव के काश्तकार प्रचुर मात्रा में फसलों का उत्पादन करते हैं। बावजूद जंगली जानवर सुअर,बंदर, लंगूर,फसलों को नष्ट कर देते हैं। बता दें कि इस क्षेत्र में अदरक सहित अन्य सब्जियों का खूब उत्पादन किया जाता है। मंडियों मे यहां के अदरक की डिमांड है। मंडी समिति पूर्व अध्यक्ष बीर सिंह रावत ने बताया कि दोगी और कुंजणी पट्टी में नकदी फसलों का उत्पादन होता है। वन,कृषि और उद्यान विभाग को प्रभावित काश्तकारों को मुआवजा देने चाहिए।

