सरोकार: दिव्यांगों के लिए सुविधाजनक सार्वजनिक सफर जरूरी

सरोकार: दिव्यांगों के लिए सुविधाजनक सार्वजनिक सफर जरूरी
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अली खान
ज देश में रेल परिवहन आम जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण और सुलभ सार्वजनिक परिवहन साधनों में से एक है। आम जनता की जरूरतों के साथ-साथ विशेष तौर पर दिव्यांगों का ख्याल रखते हुए सार्वजनिक सफर को सुविधाजनक बनाया जाना समावेशी विकास के लिए बेहद जरूरी भी है। सार्वजनिक सफर में दिव्यांगजन आमतौर पर दिक्कतों का सामना करते हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने दिव्यांग लोगों के लिए रेल यात्रा को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए मसौदा दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ टेक्स्ट-टू- स्पीच (एक ऐसी सुविधा जिसमें जब कोई व्यक्ति स्क्रीन पर लिखता है, तो उसे श्रव्य ध्वनि में बदल दिया जाता है ताकि अन्य लोग इसे सुन सकें) और उपयोगकर्ता के अनुकूल चित्रलेख या चित्र वाले चार्ट जैसी प्रौद्योगिकी आधारित सुविधाएं प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। विकलांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने रेलवे का उपयोग करने वाले दिव्यांग लोगों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के लिए प्रस्तावित दिशा निर्देशों पर हितधारकों और जनता से 29 जनवरी तक टिप्पणियां, आपत्तियां और सुझाव देने को कहा है। इस नीति में आम जनता के सुझावों के आधार पर नीति को पूरे देश में लागू किया जाएगा। प्रस्तावित दिशा निर्देशों में दिव्यांगजनों को सभी सुविधाओं तक पहुंचने में मदद करने के लिए एक समर्पित वेबसाइट की आवश्यकता का भी उल्लेख किया गया है, जो उन्हें सभी सुविधाओं तक पहुंच बनाने में मदद करेगी।
मसौदा दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि ये सुविधाएं दुनियाभर के अन्य देशों में उपयोग की जाने वाली सुविधाओं के सिद्धांतों पर आधारित होंगी और वेबसाइट वर्ल्ड वाइड वेब दिशा- निर्देशों के अनुरूप होगी। जिसमें ‘टेक्स्ट-टू-स्पीच और ग्राफिक्स जैसी सुविधाएं मौजूद रहेंगी। बता दें कि मसौदे में दिव्यांग लोगों के लिए एक समर्पित मोबाइल ऐप और श्वन-क्लिक टेम्पलेट बनाना भी शामिल है, जो स्टेशनों के साथ-साथ ट्रेन में भी उनके लिए उपलब्ध सभी जानकारी और सुविधाओं को प्रदर्शित करेगा। सभी स्टेशनों पर प्रबुद्ध साइन बोर्ड लगाने का भी प्रस्ताव किया गया है, जिसमें ब्रेल संकेत भी होंगे। दिव्यांग व्यक्तियों के साथ प्रभावी संचार सुनिश्चित करने के लिए काउंटर कर्मियों को सांकेतिक भाषा में प्रशिक्षित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि दिशा-निर्देशों में रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में प्रवेश और निकास को सुलभ बनाने, रैंप और रेलिंग स्थापित करने और स्पष्ट साइन बोर्ड के साथ पार्किंग सुविधाओं को विकलांगों के लिए सुलभ बनाने की सिफारिश की गई है। साथ ही दिशा निर्देशों में प्लेटफार्मों पर सुलभ लिफ्ट सुविधाओं और प्रकाश व्यवस्था के बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता का उल्लेख है।
गौरतलब है कि हमारे देश का संविधान अपने सभी नागरिकों के लिए समानता, स्वतंत्रता, न्याय व गरिमा सुनिश्चित करता है और स्पष्ट रूप से यह विकलांग व्यक्तियों समेत एक संयुक्त समाज बनाने पर जोर डालता है। हाल के वर्षों में दिव्यांगों के प्रति समाज का नजरिया तेजी से बदला है। यह माना जाता है कि यदि दिव्यांग व्यक्तियों को समान अवसर तथा प्रभावी पुनर्वास की सुविधा मिले तो वह बेहतर गुणवत्तापूर्ण जीवन व्यतीत कर सकते हैं। लिहाजा, दिव्यांगों को अवरोध मुक्त वातावरण मुहैया कराने के लिए रणनीतियां बनाए जाने की सख्त आवश्यकता है। इनमें सार्वजनिक भवन, परिवहन सुविधाएं जैसे कि सड़क, फुटपाथ, रेलवे प्लेटफार्म, बस स्टॉप के साथ परिवहन के माध्यम यथा बस, ट्रेन और वायुयान के साथ-साथ खेल के मैदान, खुले स्थान इत्यादि को दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आसानी से पहुंच के लायक बनाया जाना चाहिए। वहीं, हमारे देश की कुल दिव्यांग आबादी की बात करें तो वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक, भारत में 2.68 करोड़ दिव्यांगजन है। जो की कुल जनसंख्या का 2.21 फ ीसदी है। कुल दिव्यांगजनों में से 1.50 करोड़ पुरुष हैं और 1.18 करोड़ स्त्रियां हैं। इनमें दृष्टिबाधित, श्रवण बाधित, वाक् बाधित, चलन बाधित, मानसिक रोगी, मानसिक मंदता, बहु नि:शक्तता तथा अन्य नि:शक्तता से ग्रस्त व्यक्ति शामिल हैं। इतनी बड़ी आबादी को समान अवसर उपलब्ध करवाना सरकारों की जिम्मेवारी हैं। इसी दिशा में केंद्र सरकार की ओर से दिव्यांगों के अनुकूल रेल यात्रा को और अधिक सुविधाजनक बनाने का प्रयास सराहनीय है। आज दिव्यांग लोगों के लिए न केवल रेल यात्रा बल्कि सड़क परिवहन को भी सुविधाजनक बनाया जाना चाहिए।
यह देखा गया है कि सड़कों के किनारे बने बस ठहराव स्थल की बनावट ऐसी होती है कि अगर वहां बस आकर रुके तो किसी दिव्यांग के लिए उसमें सवार होना आसान नहीं होता है। ऐसे में यदि लो फ्लोर बसों को अधिकतम उपयोग में लाया जाता है तो व्हीलचेयर से चलने वाले दिव्यांग इनमें आसानी से चढ़ पाएंगे। बसों में दरवाजे पर अलग से खुलने वाला फ्लैप होना चाहिए, जिसके सहारे व्हीलचेयर अंदर आ सके। इसके अतिरिक्त बसों में व्हीलचेयर को रोकने के लिए लॉक सिस्टम होना चाहिए, ताकि बस के अचानक चलने या रुकने पर दिव्यांगों को परेशानी न हो। बसों में कुछ ऐसी सीटें आरक्षित की जानी चाहिए जो दिव्यांगों के अनुकूल हो। लो फ्लोर बसों में इन सब सुविधाओं के चलते दिव्यांग भी आसानी से बसों में सफर कर सकेंगे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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