असर: बहुत कुछ कह गई कांग्रेस के प्रदर्शन में उमड़ी भीड़, भाजपा की भी बढ़ा गई चिंता
देहरादून।बीते सोमवार को सचिवालय पर किए गए कांग्रेस के प्रदर्शन में जुटी पार्टी कार्यकर्ताओं व नेताओं की भीड़ और एकजुटता ने जहां एक तरफ पार्टी में जान फूंकने का काम किया है, वहीं सत्तारूढ भाजपा के माथे पर बल डाल दिए हैं। प्रदेश कांग्रेस द्वारा विपक्ष में रहते हुए इतना बड़ा और इतना उग्र प्रदर्शन एक अर्से बाद किया गया। भले ही भाजपा के प्रवक्ता और कुछ नेताओं द्वारा इस प्रदर्शन को प्रीतम सिंह का शक्ति प्रदर्शन कहा जा रहा हो लेकिन सच यह है कि इस कांग्रेसी प्रदर्शन में उमड़ी भीड़ और कांग्रेसियों की एकजुटता ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। इस प्रदर्शन में पूर्व सीएम हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष करण मेहरा की गैरमौजूदगी इस दृष्टिकोण से भी कोई मायने नहीं रखती है कि किसी भी कार्यक्रम में सभी की उपस्थिति हो पाना संभव नहीं होता है, अगर 20 में से दो चार लोग मौजूद नहीं होते तो यह गैरमौजूदगी पार्टी पर सवाल खड़े करने के लिए तर्कसंगत आधार नहीं है।
यह प्रदर्शन प्रीतम सिंह का शक्ति प्रदर्शन नहीं था कांग्रेस व जनता का शक्ति प्रदर्शन था, इस बात को इस प्रदर्शन में उमड़ी भीड़ और वर्तमान तथा पूर्व विधायकों व पूर्व मंत्रियों की उपस्थिति ने भी साबित कर दिया है। कांग्रेस के 19 में से 14 विधायकों तथा पुराने मंत्री और विधायकों की मौजूदगी इस बात को दर्शाती है कि यह प्रदर्शन कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन था जिसमें वह काफी हद तक सफल रही। इसका नेतृत्व कौन कर रहा था या आयोजन किसने किया यह बात उतने मायने नहीं रखती है जितनी अहमियत इस आयोजन की सफलता रखती है। कांग्रेस को वर्तमान में इसी तरह की एकता और सोच की जरूरत है क्योंकि बीते कुछ सालों में वह एक के बाद एक चुनाव में बड़ी असफलताएं देख चुकी है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि उसकी इन नाकामियों के पीछे सबसे अहम कारण पार्टी नेताओं के बीच जारी मनभेद और मतभेद ही रहे हैं। जो अभी खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं। पार्टी के कुछ नेताओं की यह सोच रही है कि सिर्फ वही पार्टी के सर्वे सर्वा हैं जो सर्वथा गलत है कोई भी पार्टी या संगठन एकला चलो की नीति पर आगे नहीं बढ़ सकता है। पार्टी के हर नेता और कार्यकर्ता को सम्मान देकर ही पार्टी को मजबूत बनाया जा सकता है। कांग्रेस के नेताओं को इस प्रदर्शन से सबक लेने की जरूरत है कि जब तक वह आपसी मतभेद भुलाकर साथ खड़े नहीं होंगे न उनका अपना कुछ भला हो सकता है और न पार्टी का। अगर यह मान भी लिया जाए कि यह प्रीतम सिंह का ही शक्ति प्रदर्शन था, तब भी समझने वाली बात यह है कि कांग्रेस का एक नेता अगर इतना शक्तिशाली हो सकता है तो सारे नेताओं की शक्ति कितनी होगी अगर वह एक साथ खड़े हो जाएं तो? भाजपा के नेता भले ही इस शक्ति प्रदर्शन को लेकर जो चाहे कह रहे हों लेकिन कोई भी इस शक्ति प्रदर्शन को फ्लाप शो कहने का साहस नहीं कर पाया है। सही मायने में कांग्रेस के इस शक्ति प्रदर्शन ने भाजपा नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, इसमें भी कोई संदेह नहीं है।
