ऐहतियात: बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोकने की कवायद, मानसून सीजन में जलस्तर की होगी निगरानी

ऐहतियात: बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोकने की कवायद, मानसून सीजन में जलस्तर की होगी निगरानी
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देहरादून। मानसून सीजन में नदियों की बाढ़ की वजह से होने वाले जानमाल के नुकसान को समय रहते नियंत्रित किया जा सकेगा। गंगा, यमुना, कोसी और काली समेत राज्य की प्रमुख नदियों के जल स्तर की निगरानी के लिए 59 स्थानों पर अत्याधुनिक ऑटोमेटिक वाटर लेवल रिकार्डर स्थापित किए जा रहे हैं।
इनकी मदद से अतिवृष्टि, ग्लेशियर पिघलने समेत विभिन्न वजहों से नदियों के जल स्तर में होने वाले बदलाव का अलर्ट मिल जाएगा।एचओडी-सिंचाई विभाग प्रमुख अभियंता मुकेश मोहन के अनुसार ये रिकार्डर नदियों के जल स्तर में होने वाले हर बदलाव पर बारीकी से नजर रखते हुए पल पल अपडेट देते रहेंगे। जल स्तर बढोत्तरी संकेत मिलने पर तत्काल ही प्रशासन और इससे प्रभावित हो सकने वाले क्षेत्रों को अलर्ट किया जा सकेगा।
बकौल मोहन, रिकार्डर को चरणबद्ध तरीके से स्थापित किया जाएगा। जून अंत तक राज्य में पंद्रह प्रमुख स्थानों पर रिकार्डर स्थापित कर दिए जाएंगे। जलस्तर पर नजर रखने के लिए बनाए जा रहे प्रोजेक्ट को रियल टाइम डाटा एक्वीजिशन सिस्टम (आरटीडीएएस) नाम दिया गया है। न केवल नदियों के पानी बल्कि बारिश और बर्फ की निगरानी के लिए भी सिस्टम तैयार किया जा रहा है।
नदियों में 59 ऑटोमेटिक वाटर लेवल रिकार्ड लगाए जाएंगे। इनके साथ ही बारिश को मापने के लिए 44 ऑटोमेटिक रेन गेज, 05 आटेमेटिक वेदर स्टेशन,05 स्नो गेज और 11 सामान्य रेन गेज लगाए जाएंगे। जलस्तर की जानकारी का उत्तराखंड और यूपी मिलकर लाभ उठा सकते हैं। जल स्तर में होने वाले बदलाव की जानकारी मिलने पर यूपी भी अपने क्षेत्र में समय रहते सुरक्षात्मक उपाय कर सकता है। उत्तराखंड में भूगर्भ जल भंडार की निगरानी के लिए भी नया सिस्टम तैयार किया जा रहा है। एचओडी-सिंचाई मुकेश मोहन के अनुसार एनएचपी के तहत राज्य के मैदानी जिलों में 66 जगह पर पीजोमीटर लगाए जाने हैं। इसमें अब तक 25 पीजोमीटर स्थापित कर दिए गए हैं। इनके साथ डिजीटल वाटर लेवल रिकार्डर भी लगाए जाएंगे। इनकी मदद से भूगर्भ जल के स्तर की स्थिति का सटीक आंकलन किया जा सकता है। इनकी रिपेार्ट के आधार पर भूगर्भ की कमी वाले क्षेत्रों में उपचार के प्रयास किए जा सकते हैं।

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