टकराव: काले झंडे लेकर वेल में पहुंचे कांग्रेसी विधायक, मंत्री रेखा आर्या पर लगे आरोपों को लेकर सदन में हंगामा
गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र के दूसरे और अंतिम दिन बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला। सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायक काले झंडे लेकर वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई। हंगामे के चलते विधानसभा अध्यक्ष को पहले दोपहर 12 बजे तक और फिर कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विरोध जारी रहने के कारण सदन स्थगित करना पड़ा।
सदन के भीतर कांग्रेस ने मंत्री रेखा आर्या से जुड़े आरोपों को प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए। वहीं, रेखा आर्या ने कांग्रेस के वर्ष 2012 से 2017 के शासनकाल का उल्लेख करते हुए विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन की कार्यवाही प्रभावित होती रही।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर चर्चा कराने की आवश्यकता उठाई। दूसरी ओर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष की ओर से काम रोको प्रस्ताव लाने की मंशा पर सवाल खड़े किए। सत्ता पक्ष के विधायकों ने चकराता में एक परिवार को कांग्रेस नेताओं द्वारा कथित तौर पर धमकी दिए जाने का मामला भी सदन में उठाया और इसकी जांच कर कार्रवाई की मांग की।
विधानसभा सत्र के दौरान अंकिता भंडारी प्रकरण और प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर भी विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में था। अंकिता भंडारी प्रकरण प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। विपक्ष इस मामले में सरकार की भूमिका, जांच और अब तक की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाता रहा है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में आपराधिक घटनाओं, महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली जैसे विषयों पर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग भी विपक्ष की रणनीति का हिस्सा रही।
विपक्ष की कोशिश थी कि इन मुद्दों पर सदन में विस्तार से चर्चा हो और सरकार अपना पक्ष रखे। हालांकि, सदन की शुरुआत से ही जारी हंगामे के कारण विधायी कार्यवाही प्रभावित हुई। ऐसे में जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए उपलब्ध समय भी महत्वपूर्ण हो गया।
सदन में राजनीतिक टकराव के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गैरसैंण में 231.91 करोड़ रुपये की 12 विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें 197.87 करोड़ रुपये की छह योजनाओं का शिलान्यास तथा 34.04 करोड़ रुपये की छह योजनाओं का लोकार्पण शामिल है। सरकार के अनुसार, इन योजनाओं का संबंध सड़क, पेयजल, शिक्षा, सुरक्षा और पुलिस अवस्थापना से है। इन परियोजनाओं के माध्यम से बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने और विकास कार्यों को गति देने का लक्ष्य रखा गया है। योजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण को सरकार ने प्रदेश में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। मुख्यमंत्री की ओर से विकास योजनाओं की घोषणा और दूसरी ओर सदन में विपक्ष के विरोध ने सत्र के दूसरे दिन की राजनीतिक तस्वीर को दो हिस्सों में बांट दिया। एक तरफ सरकार विकास कार्यों और बजट संबंधी प्रावधानों को प्रमुखता दे रही थी, तो दूसरी तरफ विपक्ष आरोपों की जांच और जनहित के मुद्दों पर जवाब की मांग कर रहा था।
इससे पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट विधानसभा में पेश किया था। बुधवार को इस बजट पर चर्चा और मतदान के साथ विभिन्न विधेयकों को पारित कराने की कार्यवाही प्रस्तावित थी। अनुपूरक बजट के माध्यम से सरकार वित्तीय वर्ष के दौरान आवश्यक अतिरिक्त व्यय के लिए बजटीय प्रावधान करती है। ऐसे में बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष को सरकार की प्राथमिकताओं, व्यय संबंधी प्रावधानों और विभिन्न विभागों के लिए निर्धारित राशि पर सवाल उठाने का अवसर मिलता है। हालांकि, सदन में हंगामे के कारण चर्चा की प्रक्रिया प्रभावित रही। विधानसभा के दूसरे दिन का एजेंडा केवल बजट तक सीमित नहीं था। सरकार की ओर से विभिन्न विभागों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से संबंधित विधेयकों को भी आगे बढ़ाया जाना था। विधानसभा की कार्यसूची में सिंचाई जल निकासी, राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन संशोधन, निवेश और आधारिक संरचना विकास एवं विनियमन संशोधन, जन विश्वास द्वितीय संशोधन, अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम संशोधन, सिविल विधि संशोधन, अग्निशमन एवं आपात सेवा, माल एवं सेवा कर संशोधन तथा निजी विश्वविद्यालय द्वितीय संशोधन विधेयक शामिल थे। इन विधेयकों के जरिए विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों में संशोधन किए जाने थे। विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित कराने की प्रक्रिया विधानसभा के विधायी कामकाज का अहम हिस्सा थी। लेकिन सदन की शुरुआत से ही जारी विरोध ने राजनीतिक माहौल को गर्म बनाए रखा।
भराड़ीसैंण में सत्र के दौरान सड़क पर प्रदर्शन और सदन के भीतर विरोध ने सरकार तथा विपक्ष के बीच मतभेदों को सामने ला दिया। विपक्ष कथित भ्रष्टाचार के आरोपों, अंकिता भंडारी प्रकरण और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहा था। वहीं, सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों का प्रतिवाद करते हुए अपने मुद्दे उठाए और विकास योजनाओं को प्राथमिकता के साथ सामने रखा। विधानसभा सत्र का उद्देश्य सरकार के कामकाज की समीक्षा, जनहित के मुद्दों पर चर्चा, बजट संबंधी निर्णय और विधायी कार्यवाही को आगे बढ़ाना होता है। ऐसे में सदन में हंगामे और कार्यवाही स्थगित होने से यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए कितना समय उपलब्ध हो पाता है। दूसरे दिन की कार्यवाही में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और विकास संबंधी घोषणाएं साथ-साथ चलती रहीं। अब इन मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच आगे की राजनीतिक बहस किस दिशा में जाती है, इस पर प्रदेश की निगाहें रहेंगी।

