चिंताजनक: खाद्य पदार्थों में मिलावट से लीवर-किडनी पर खतरा, गर्भस्थ शिशु के विकास पर भी बुरा असर

चिंताजनक: खाद्य पदार्थों में मिलावट से लीवर-किडनी पर खतरा, गर्भस्थ शिशु के विकास पर भी बुरा असर
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हल्द्वानी(आरएनएस)।   खाद्य पदार्थों में मिलाए जाने वाले हानिकारक रसायन और दूसरे पदार्थ पाचन तंत्र को प्रभावित करने के साथ लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचा रहे हैं।  रोजमर्रा की थाली में शामिल दूध, मावा, पनीर, घी, मसाले, फल और सब्जियां सेहत बनाने के बजाय बीमारियों का कारण भी बन सकते हैं। मिलावटी और दूषित भोजन से उल्टी-दस्त, संक्रमण और फूड पॉइजनिंग का खतरा भी बढ़ता है। खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि हानिकारक रसायनों के संपर्क में आने से गर्भस्थ शिशु का विकास प्रभावित होने का जोखिम बढ़ जाता है। दूध-मावे से मसालों तक मिलावट का खतरा है।

खाद्य पदार्थों में मिलावट के तरीके:  
मिलावट खोर दूध, मावा, पनीर, घी, मसाले आदि में रसायनों के साथ यूरिया, डिटर्जेंट, शुगर, स्टार्च, पॉम आयल, नमक, सिंथेटिक कलर आदि का इस्तेमाल करते हैं। मसालों में लकड़ी का बुरादा या फिर अन्य पिसे पदार्थ मिलाकर गुणवत्ता खराब कर देते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की मानें तो यह सभी मानव शरीर के लिए बेहद हानिकारक हैं। इनके उपयोग से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की प्रयोगशाला में इन रसायनों समेत करीब आठ से नौ प्रकार के मानकों पर खाद्य पदार्थों की जांच की जाती है।

फल और सब्जियों में मिलावट की आशंका:  
मंडी के सब्जी कारोबारियों के मुताबिक, कुछ लोग सब्जियों को ताजा और चमकदार दिखाने के लिए सिंथेटिक रंगों का इस्तेमाल कर सकते हैं। सब्जियों की पैदावार बढ़ाने के लिए रसायनों और कीटनाशकों के अनुचित इस्तेमाल से भी स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा हो रहे हैं। हालांकि, फल-सब्जियों में इस तरह की मिलावट का मामला भले ही सामने नहीं आया, लेकिन कारोबारी अक्सर ऐसी शिकायतें करते रहते हैं। कारोबारियों ने पुराने आलू को पहाड़ी आलू जैसा दिखाने के लिए रेड ऑक्साइड और विशेष प्रकार की मिट्टी के इस्तेमाल की बात भी कही। इससे ग्राहक असली और मिलावटी उत्पाद के बीच अंतर नहीं कर पाते। वहीं, विदेशों से आने वाले कुछ फलों पर उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए खाद्य गुणवत्ता के अनुरूप कोटिंग की जाती है।

गर्भावस्था में दूषित भोजन के जोखिम:  
गर्भावस्था के दौरान दूषित या हानिकारक रसायनों वाले खाद्य पदार्थों का सेवन मां के साथ गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है। बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में शिशु के अंगों का विकास तेजी से होता है। इस दौरान कुछ हानिकारक रसायनों के संपर्क में आने से विकास प्रभावित होने और समय से पहले प्रसव जैसी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। तंत्रिका तंत्र समेत शरीर के दूसरे अंगों पर भी असर पड़ता है।

मिलावटी भोजन से कैंसर और अंगों को नुकसान:
स्टेट कैंसर इंस्टीटयूट हल्द्वानी के निदेशक डॉ. केसी पांडे ने बताया कि कैंसर अलग-अलग कारणों से होता है। सबसे अधिक तंबाकू और शराब के सेवन से कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। मिलावटी खाद्य पदार्थों से भी कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। मिलावटी खाद्य पदार्थों में कई ऐसे रसायन होते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। अगर वह लंबे समय तक खाए जाते हैं तो यह लीवर, किडनी समेत कई अंगों को प्रभावित करते हैं। धीरे-धीरे कैंसर का कारण भी बन सकते हैं।

लीवर और किडनी पर असर:
राजकीय मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. पंकज वर्मा ने बताया कि मिलावटी खाद्य पदार्थ खाने से सबसे पहले पेट संबंधी बीमारियां शुरू होती हैं। उल्टी-दस्त, फूड पॉइजनिंग, संक्रमण के मामले सामने आते हैं और धीरे-धीरे लीवर और किडनी जैसे अंगों के फेलियर जैसे मामले सामने आ सकते हैं। अमाशय में गंभीर शिकायतें आनी शुरू हो जाती हैं। धीरे-धीरे मल्टीपल अंगों पर प्रभाव शुरू हो जाता है।

बच्चों के स्वास्थ्य पर मिलावट का असर:
बेस अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एमएस रावत ने बताया कि मिलावटी खाद्य पदार्थों का सबसे ज्यादा असर बच्चों की सेहत पर पड़ता है। उनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे में वह जल्दी रोगों की चपेट में आ जाते हैं। अगर बच्चों को मिलावटी दूध दिया जाए तो वह बहुत जल्दी उल्टी-दस्त, फूड पॉइजनिंग, संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। बच्चे कुपोषण का शिकार हो सकते हैं। रसायनयुक्त और मिलावटी खाद्य पदार्थ खाने मल्टीपल ऑर्गन प्रभावित हो सकते हैं। अक्सर डायरिया की शिकायतें आती रहती हैं।

मिलावटी तेल और मिठाइयों के खतरे:
राजकीय महिला अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. अखिलेश ने बताया कि मिलावटी तेल के उपयोग से धीरे-धीरे नशों में खून के थक्के जमने शुरू हो जाते हैं, जिससे हाईअटैक की आशंका बढ़ जाती है। वहीं मिलावटी शुगर की वजह से ट्रॉइक्लोसाइड बढ़ता है। मिठाइयों में सिल्वर फॉल (वर्क) भी सेहत के लिए खतरनाक है। सिल्वर फॉल लगी मिठाइयों का प्रयोग करने से बचना चाहिए।

मिलावट रोकने के लिए सख्ती:
आलू फल व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश जोशी का कहना है कि मंडी में कई प्रकार की सब्जियां बाहर से आयात की जाती हैं, फूल विदेशों से आता है। फलों को सुरक्षित रखने के लिए कोटिंग की जाती है। सब्जियों में कृत्रिम रंग की जांच को लेकर कारोबारी अक्सर मंडी प्रशासन से शिकायत करते रहते हैं। कार्रवाई भी होती है, लेकिन मिलावट रोकने को लेकर और सख्ती बरतने की जरूरत है।

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