चेतावनी: अमेरिकी दूतावास ने सऊदी अरब को फिर किया आगाह, कहा- और तेज होंगे हमले
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रियाद(RNS)। सऊदी अरब में यमन के हूती विद्रोहियों के संभावित हमलों को देखते हुए अमेरिकी दूतावास ने एक बार फिर सुरक्षा चेतावनी जारी की है। अमेरिकी मिशन ने मंगलवार को जारी बयान में आशंका जताई कि हमले तेजी से फैल सकते हैं और उनका दायरा मौजूदा प्रभावित क्षेत्रों से बाहर तक बढ़ सकता है। सुरक्षा जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब में कार्यरत अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों को किसी भी हवाई अड्डे का इस्तेमाल करने से पहले मिशन प्रमुख से विशेष अनुमति लेने का निर्देश दिया गया है।
अमेरिकी मिशन के अनुसार, रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने 23 अक्टूबर से कुछ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए आंशिक रूप से परिचालन शुरू कर दिया है। वहीं, कासिम स्थित प्रिंस नायफ बिन अब्दुलअजीज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भी कुछ उड़ानों का संचालन किया जा रहा है।
इसके अलावा, जेद्दा स्थित किंग अब्दुलअजीज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और दम्मम स्थित किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी उड़ानें संचालित हो रही हैं। हालांकि, सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों के कारण कुछ उड़ानों में देरी हो रही है, जबकि कुछ उड़ानें रद्द भी की जा रही हैं। यात्रियों को हवाई अड्डे जाने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की पुष्टि करने की सलाह दी गई है।
अमेरिका ने 23 अक्टूबर को सुरक्षा जोखिमों के मद्देनजर गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को सऊदी अरब छोड़ने का आदेश दिया था। इस कदम के पीछे क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा खतरों को प्रमुख कारण बताया गया है।
अमेरिकी प्रशासन सऊदी अरब में अपने कर्मचारियों की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगा चुका है। यमन की सीमा से 20 मील यानी लगभग 32 किलोमीटर के दायरे में अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों को यात्रा करने की अनुमति नहीं है।
सुरक्षा प्रतिबंधों के तहत अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों को सऊदी अरब के जीजान, असीर और नजरान प्रांतों के अलावा कतीफ, यानबू और ताइफ शहरों की यात्रा करने के लिए भी विशेष अनुमति लेनी पड़ती है।
अमेरिकी मिशन ने संभावित हमलों के विस्तार की आशंका जताते हुए सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करने पर जोर दिया है। क्षेत्र में सुरक्षा की बदलती परिस्थितियों के बीच हवाई सेवाओं और सरकारी कर्मचारियों की आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंधों का उद्देश्य संभावित खतरों से बचाव करना है।

