आरोप: सीजेपी बोली- ‘मोदी ने आपातकाल को पीछे छोड़ा, नागरिकों के खिलाफ युद्ध लड़ रही सरकार
नई दिल्ली (आरएनएस)। दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। पार्टी के नेताओं ने पिछले 72 घंटों के घटनाक्रम को लेकर सरकार की आलोचना की और मौजूदा हालात की तुलना वर्ष 1975 के आपातकाल से की। सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़े विवाद में सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। हालांकि, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ लगाए गए आरोप पार्टी के नेताओं के दावे हैं।
सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे महान प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं, लेकिन पिछले 72 घंटों में जो घटनाएं हुई हैं, उन्होंने आपातकाल के दौर की याद दिला दी है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1975 के आपातकाल के दौरान भी रेल सेवाएं बंद नहीं की गई थीं, जबकि हालिया घटनाक्रम में रेल सेवाएं रोके जाने की बात सामने आई है।
आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने खिलाफ लड़ाई बना लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ज्ञानेश कुमार का बचाव करने में जुटी है। रांका ने प्रधानमंत्री को तानाशाह बताते हुए कहा कि यह संघर्ष अब शुरू हुआ है और सरकार ने इसे युद्ध का रूप दे दिया है।
आशुतोष रांका ने कहा कि पिछले 72 घंटों में देश में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिनकी पहले कल्पना करना भी मुश्किल था। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा करना और उसे मजबूत बनाना है, लेकिन आयोग समझौता कर चुका है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भारतीय जनता पार्टी को चुनाव जिताने के लिए काम करने का आरोप भी लगाया।
सीजेपी ने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए इतनी सक्रिय क्यों है। पार्टी आरोप:के नेताओं ने यह भी पूछा कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त के पास कोई ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी है, जिसके कारण सरकार उनका बचाव कर रही है।
सीजेपी नेता सौरभ दास ने हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया। उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की भूमिका पर सवाल करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों के साथ हिरासत में प्रताड़ना किए जाने के आरोपों पर संबंधित संस्थाओं को ध्यान देना चाहिए।
सौरभ दास ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों को रेलगाड़ियों में भरकर भेजा जा रहा है और पत्रकारों के साथ भी मारपीट की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या देश में पत्रकारिता करना अपराध बन गया है। उनके अनुसार, पत्रकारों के साथ कथित व्यवहार भी आपातकाल जैसी स्थिति की ओर संकेत करता है। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
सीजेपी की ओर से बताया गया कि दीपके अपनी दादी के निधन के बाद महाराष्ट्र स्थित अपने घर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आशुतोष रांका और सौरभ दास दोपहर दो बजे प्रेस वार्ता कर आगे की रणनीति और कार्रवाई की घोषणा करेंगे।
दीपके ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा के नाम पर राजधानी की गतिविधियां बाधित की गईं। उन्होंने कहा कि सीजेपी न तो पीछे हटेगी और न ही डरेगी। पार्टी ने 10 अक्टूबर को कथित तानाशाही के अंत की शुरुआत बताते हुए विरोध जारी रखने का ऐलान किया।
सीजेपी की प्रेस वार्ता में केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया तथा स्वतंत्र पुष्टि के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

