सख़्त एक्शन: जेसीबी गरजी तो भूमाफियाओं की ‘प्लाटिंग की दुकान’ हुई बंद!
करीब 15 बीघा जमीन पर कथित अवैध कब्जे और प्लाटिंग के खिलाफ प्रशासन ने की बड़ी कार्रवाई
देहरादून। शिमला बाईपास के पास ग्राम शेरपुर में करीब 15 बीघा जमीन पर कथित अवैध कब्जे और प्लाटिंग के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू की। शुक्रवार को मौके पर पहुंची जेसीबी ने अवैध निर्माण और कब्जे को ध्वस्त करना शुरू किया तो क्षेत्र में हड़कंप मच गया। प्रशासन की कार्रवाई से फिलहाल जमीन पर चल रही कथित प्लाटिंग पर ब्रेक लग गया है, लेकिन अब कार्रवाई की अगली कड़ी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि कार्रवाई की जद में आई जमीन में ग्राम समाज और नदी श्रेणी की भूमि भी शामिल है। आरोप है कि कुछ लोगों ने कथित तौर पर सरकारी भूमि पर कब्जा कर उसे छोटे-छोटे भूखंडों में बांटकर प्लाटिंग करने का प्रयास किया। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल अवैध निर्माण हटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी भूमि पर कब्जे, प्लाटिंग और कथित खरीद-फरोख्त से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच का विषय बन सकता है।
प्रशासन ने जेसीबी चलाकर अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई तो शुरू कर दी, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि कब्जे के पीछे कौन लोग थे? क्या कार्रवाई केवल निर्माण ध्वस्त करने और जमीन खाली कराने तक सीमित रहेगी या संबंधित लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होगी?
स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि जमीन सरकारी अथवा नदी श्रेणी की थी तो उस पर कथित प्लाटिंग कैसे शुरू हुई? जमीन को प्लाटों में किसने बांटा और यदि किसी स्तर पर बिक्री या सौदे का प्रयास हुआ तो इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे? इन सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच से ही सामने आ सकता है।
शेरपुर में हुई कार्रवाई ने देहरादून में सरकारी और नदी श्रेणी की जमीन पर कथित कब्जों तथा अवैध प्लाटिंग को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की कार्रवाई से जमीन पर किया गया निर्माण तो हटाया जा सकता है, लेकिन इस तरह के मामलों में असली चुनौती उन लोगों की पहचान करना है, जिन्होंने कथित तौर पर सरकारी जमीन को प्लाटिंग के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की।
अब देखना यह है कि शेरपुर में कार्रवाई सिर्फ जेसीबी तक सीमित रहती है या प्रशासन भूमि अभिलेखों, कब्जे की अवधि, प्लाटिंग की प्रक्रिया और कथित खरीद-फरोख्त की भी जांच कर जिम्मेदारी तय करता है।
फिलहाल जेसीबी का पीला पंजा जमीन पर चल रहा है, लेकिन कार्रवाई का अगला कदम ही तय करेगा कि यह सिर्फ कब्जा हटाने की कार्रवाई है या फिर कथित अवैध प्लाटिंग के पूरे नेटवर्क की जांच की शुरुआत।

