ख़ौफ़: ज्योतिर्मठ में भालुओं की बढ़ती दस्तक से दहशत में ग्रामीण

ख़ौफ़: ज्योतिर्मठ में भालुओं की बढ़ती दस्तक से दहशत में ग्रामीण
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चमोली। जिले के सीमांत नगर ज्योतिर्मठ में इन दिनों भालुओं की बढ़ती आवाजाही ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जंगलों तक सीमित रहने वाले भालुओं का आबादी के आसपास लगातार नजर आना मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को बढ़ा रहा है। हालात को देखते हुए नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन ने निगरानी बढ़ाते हुए क्यूआरटी को रात में भी मैदान में उतार दिया है।
  देर शाम से मध्यरात्रि तक उप वन संरक्षक नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क यश ढोबले के नेतृत्व में क्यूआरटी टीम ने नगर के संवेदनशील इलाकों में रात्रि गश्त की। टीम ने भालुओं की गतिविधियों और उनके संभावित आवागमन वाले रास्तों को खंगाला। रात्रि निरीक्षण के दौरान भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून तथा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के विशेषज्ञ भी टीम के साथ मौजूद रहे।
गांधीनगर, न्यू रविग्राम, सैन्य क्षेत्र, सुनील-मनोती और औली क्षेत्र में भालुओं की गतिविधियों की सूचनाओं ने स्थानीय लोगों को सतर्क कर दिया है। शाम ढलने के बाद इन इलाकों में लोगों को आवाजाही को लेकर विशेष सावधानी बरतनी पड़ रही है। आबादी के नजदीक भालुओं की मौजूदगी ने यह चिंता भी बढ़ा दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इंसान और वन्यजीव के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है।
रात्रि गश्त के दौरान टीम ने भालुओं के मूवमेंट वाले संभावित क्षेत्रों का जायजा लिया और उनकी गतिविधियों को समझने का प्रयास किया। वन विभाग की कोशिश है कि भालुओं की आवाजाही पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी स्थिति में वन्यजीव और लोगों का आमना-सामना न हो।
विशेषज्ञों ने प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से भी संवाद किया। लोगों को भालुओं से बचाव के तरीके बताए गए और विशेष रूप से रात के समय सतर्क रहने की सलाह दी गई। वन विभाग की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि भालू दिखाई देने पर उसके नजदीक जाने, उसे घेरने या उकसाने के बजाय तत्काल वन विभाग को सूचना दें। डीएफओ यश ढोबले स्वयं क्यूआरटी के साथ निगरानी में जुटे हैं। रात्रि गश्त के दौरान भालुओं की गतिविधियां टीम के संज्ञान में आने के बाद संवेदनशील इलाकों में निगरानी और तेज कर दी गई है। संभावित मूवमेंट वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर वहां लगातार नजर रखी जा रही है। फिलहाल वन विभाग की सक्रियता से किसी अप्रिय घटना को रोकने की कोशिश की जा रही है, लेकिन आबादी के आसपास भालुओं की लगातार बढ़ती गतिविधियां एक गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। सवाल यह है कि भालुओं का मूवमेंट आखिर आबादी की ओर क्यों बढ़ रहा है और इसका स्थायी समाधान क्या होगा? फिलहाल वन विभाग की क्यूआरटी रात-दिन निगरानी में जुटी है और ज्योतिर्मठ के संवेदनशील इलाकों पर नजर बनी हुई है।

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