आवाज़: दो साल से भुगतान न मिलने पर भड़के लोक कलाकार, 10 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास कूच की चेतावनी
देहरादून। उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाले लोक कलाकार अब अपने हक और मेहनताने के लिए सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। लोक कलाकार संरक्षण संघ ने लंबित भुगतान समेत विभिन्न मांगों को लेकर 10 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास कूच करने का ऐलान किया है। संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने कलाकारों की समस्याओं का समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
सोमवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में संघ के अध्यक्ष जितेंद्र बलोनी, महासचिव बच्चन सिंह राणा, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र राणा, कुंदन सिंह चौहान और गिरीश पहाड़ी ने आरोप लगाया कि लोक कलाकारों से लगातार सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति तो कराई जा रही है, लेकिन उनकी मेहनत का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा। पदाधिकारियों के मुताबिक पिछले करीब दो वर्षों से कलाकारों द्वारा किए गए विभिन्न कार्यक्रमों की प्रस्तुति का भुगतान लंबित है। भुगतान मांगने पर कलाकारों को आश्वासन के बजाय उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।
कलाकारों का कहना है कि उत्तराखंड की पहचान उसकी लोक संस्कृति, लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक कलाओं से है। सरकारी आयोजनों और पर्यटन गतिविधियों में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इन्हीं कलाकारों को अपने पारिश्रमिक के लिए बार-बार विभागों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर पूर्व में भी सांस्कृतिक दलों की ओर से सांकेतिक प्रदर्शन किए जा चुके हैं, लेकिन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ। उनका आरोप है कि संस्कृति विभाग में कार्यक्रम आवंटन की व्यवस्था भी पारदर्शी नहीं है और कलाकारों को अनावश्यक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
इन मांगों को लेकर आर-पार की तैयारी
लोक कलाकार संरक्षण संघ ने संस्कृति विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार के साथ कई प्रमुख मांगें उठाई हैं। इनमें कार्यक्रम आवंटन की व्यवस्था में सुधार, जीएसटी की बाध्यता समाप्त करना, बार-बार एडिशन की प्रक्रिया पर रोक, कलाकारों के मानदेय और यात्रा भत्ते में वृद्धि प्रमुख हैं।
इसके अलावा संगठन ने सरकारी योजनाओं में 80 प्रतिशत तक स्थानीय लोक कलाकारों की भागीदारी सुनिश्चित करने, पर्यटन स्थलों पर नियमित रूप से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित कराने और आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी की है।
कलाकारों का कहना है कि प्रदेश सरकार पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कलाकारों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। कई लोक कलाकारों की आजीविका पूरी तरह सांस्कृतिक प्रस्तुतियों पर निर्भर है। ऐसे में लंबे समय तक भुगतान अटकने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है।
संघ ने सरकार से मांग की है कि 10 सितंबर से पहले लंबित भुगतान जारी करने और सभी मांगों पर ठोस निर्णय लेने की पहल की जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया तो 10 सितंबर को बड़ी संख्या में लोक कलाकार मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करेंगे और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज किया जाएगा।

