आक्रोश: आशाओं ने अपनी मांगों को लेकर किया जोरदार प्रदर्शन, आन्दोलन तेज करने की चेतावनी

आक्रोश: आशाओं ने अपनी मांगों को लेकर किया जोरदार प्रदर्शन, आन्दोलन तेज करने की चेतावनी
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संवाददाता
देहरादून 15 सितंबर।
उत्तराखंड आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ता यूनियन से संबंधित समस्त आशा वर्कर अपनी 12 सूत्री मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार करके धरना प्रदर्शन कर रही हैं। गत 9 अगस्त को सचिवालय में प्रतिनिधि मंडल की बैठक हुई जिसमें कई बातों पर कार्यवाही करने की सहमति बनी। मीटिंग में स्वास्थ्य सचिव महानिदेशक एवं मिशन डायरेक्टर आदि थे। उसके बाद 12 अगस्त को सीटू से संबंधित आशा वर्कर्स के साथ महानिदेशक तथा मिशन डायरेक्टर की दोबारा वार्ता हुई, जिसमें 4000 प्रतिमा बढ़ोतरी का प्रस्ताव बनाया गया। महानिदेशक के द्वारा वह प्रस्ताव 13 तारीख को शासन को भेजा गया। 2 अगस्त से उत्तराखंड आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ता यूनियन के समस्त आशा वर्कर्स कार्य बहिष्कार करके हड़ताल पर हैं। जैसा कि सबको पता है, अब महानिदेशक के द्वारा प्रस्ताव भेजे जाने के बाद कई बार कैबिनेट की बैठक भी हुई है और विधानसभा सत्र भी हुआ है। आशाओं ने खटीमा कैंप कार्यालय का घेराव भी किया और विधानसभा सत्र के दौरान 27 अगस्त को देहरादून में विशाल रैली भी निकाली। खटीमा कैंप कार्यालय के दौरान मुख्यमंत्री से वार्ता हुई थी, जिसमें मुख्यमंत्री द्वारा 20 दिन का समय कार्यवाही हेतु दिया गया था। आशा वर्कर अभी भी कार्य बहिष्कार करके हड़ताल पर हैं। आज़ बुधवार को भी सीएमओ कार्यालय, सहसपुर ब्लॉक, रायपुर ब्लॉक, प्रेम नगर हॉस्पिटल, कालसी व चकराता सभी जगह पूरे गढ़वाल मंडल में आशा वर्कर्स हड़ताल पर बैठी हैं। धरना प्रदर्शन पर कर रही हैं। स्वास्थ्य महानिदेशक के द्वारा 13 अगस्त को जब प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है, उसके बाद कई बार कैबिनेट की बैठक भी हुई और विधानसभा सत्र भी चला लेकिन इस दौरान एक बार भी आशा वर्कर्स के बारे में चर्चा नहीं हुई। जहां भी मुख्यमंत्री का दौरा होता है, वहां आशा वर्कर उनसे शासनादेश शीघ्र जारी करने का अनुरोध करती हैं लेकिन मुख्यमंत्री का एक ही जवाब होता है कि चर्चा चल रही है, बात चल रही है। आखिर कब तक ऐसे ही टाल-मटोल होती रहेगी। अब आशाओं का सब्र का बांध टूट रहा है। अब सभी आशा वर्कर्स ने यह फैसला किया है कि 20 सितंबर तक शीघ्र शासनादेश जारी नहीं किया गया तो आशा वर्कर्स अब कड़ा आंदोलन करेंगी। जगह-जगह धरना प्रदर्शन न करने के बजाय अब सचिवालय के गेट पर ही धरना प्रदर्शन किया जाएगा। सरकार का रवैया बहुत ही लापरवाही भरा है। आशा वर्कर्स के हड़ताल पर जाने की वजह से जो भी नुकसान हो रहा है, उसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन की होगी। ‌‌

धरना प्रदर्शन में शिवा दुबे प्रांतीय अध्यक्ष आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ता यूनियन, कलावती चंदोला, सुनीता चौहान, नीरा कंडारी, धर्मिष्ठा भट्ट, आशा चौधरी, मीणा ज़ख्मोला लोकेश देवी, गीता, सरोज बाला, सरिता नौटियाल, सीमा, नीलम, किरण, रोशनी राणा, बबीता शर्मा,नीरज ,सुनीता पाल,पूजा शर्मा, पिंकी सोलंकी, चन्देश्वरी सकलानी, कल्पेशवरी , गीता ,सुनीता, हंशी नेगी , बबीता राणा ,किरण जगवाण, साक्षी ,सुनीता सेमवाल ,प्रमिला राणा ,सुशीला जोशी ,निर्मला जोशी ,अनिता अग्रवाल,मधु गर्ग ,नीरू जैन, पुष्पा खण्डूरी एवं बडी़ संख्या में आशा वर्कर्स मौजूद थीं।

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