सवाल: पूर्व विधायक मनोज रावत ने उठाई केदारनाथ यात्रा से मिले राजस्व के उपयोग की जांच की मांग
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ के पूर्व विधायक मनोज रावत ने पत्रकार वार्ता कर सरकार और प्रशासन पर केदारनाथ यात्रा से प्राप्त राजस्व के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद कच्ची दुकानों के आवंटन में टेंडर प्रक्रिया नहीं होती थी, लेकिन अब इसे लागू कर दिया गया है। कहा कि इससे स्थानीय लोगों पर असर पड़ेगा। साथ ही पिछले 10 वर्षों से राजस्व का अधिकार जिला पंचायत से हटाकर जिला प्रशासन को सौंप दिया गया है। मनोज रावत ने कहा कि घोड़ा-खच्चरों से टैक्स के रूप में करीब 40 करोड़ रुपये वसूले गए, जिनमें से अधिकांश धनराशि का उपयोग जनपद के नियोजित विकास कार्यों में नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जिस तरह घोड़ा-खच्चरों से राजस्व लिया जाता है उसी तरह हेलिकॉप्टर कंपनियों से भी राजस्व वसूला जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दुकानों के आवंटन और घोड़ा-खच्चरों के पंजीकरण के नाम पर गरीबों का शोषण किया जा रहा है। पहले संचालकों को 80 प्रतिशत तक बीमा सब्सिडी दी जाती थी, जो अब बंद कर दी गई है, जबकि उनसे वसूले गए राजस्व का उपयोग उनके हित में नहीं हो रहा है। उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि सरकार ने इसे राजस्व वसूली का माध्यम बना दिया है।

