मनमानी: स्कूल के छात्रावास में चल रहा पशु उपचार केंद्र, जनप्रतिनिधियों ने डीएम को दिया अल्टीमेटम
रुद्रप्रयाग। राजकीय इंटर कॉलेज फाटा के छात्रावास भवन में पिछले ढाई वर्षों से एक निजी संस्था द्वारा अस्थायी पशु उपचार केंद्र संचालित किए जाने को लेकर स्थानीय जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस संबंध में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर छात्रावास भवन को शीघ्र खाली कराने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में जिला प्रशासन ने केदारनाथ यात्रा काल के दौरान घोड़े-खच्चरों के उपचार के लिए राइंका फाटा के छात्रावास भवन को दो माह के लिए अस्थायी रूप से अधिग्रहित किया था। इस दौरान भवन को अस्थायी पशु उपचार केंद्र के रूप में पीपल्स फॉर एनिमल्स उत्तराखंड संस्था को सौंपा गया था। लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बावजूद भी भवन को विद्यालय प्रशासन को वापस नहीं सौंपा गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस केंद्र में केदारनाथ यात्रा के दौरान पशु क्रूरता के मामलों में मिले घोड़े-खच्चरों को उपचार के लिए लाया जाता है। वर्तमान में इस केंद्र का संचालन भी उक्त संस्था द्वारा किया जा रहा है। वहीं छात्रावास भवन के लंबे समय से अधिग्रहण में रहने के कारण क्षेत्रीय जनता और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
इसी मुद्दे को लेकर जनप्रतिनिधियों ने जिला सभागार में आयोजित जनता दरबार के दौरान जिलाधिकारी विशाल मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि 10 मार्च तक राइंका फाटा का छात्रावास भवन खाली कर विद्यालय को सौंपा जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि तय समयसीमा तक भवन खाली नहीं किया गया तो क्षेत्रीय जनता अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेगी और आवश्यकता पड़ने पर आमरण अनशन भी किया जाएगा।
ग्राम प्रधान रविग्राम रामेश्वर प्रसाद ने बताया कि राइंका फाटा के छात्रावास भवन में पिछले दो वर्षों से पशु उपचार केंद्र संचालित किया जा रहा है, जबकि जिला प्रशासन ने इसे केवल दो माह के लिए अधिग्रहित किया था। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार शासन-प्रशासन को लिखित रूप में अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। मजबूरन क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को जनता दरबार में ज्ञापन देकर भवन खाली कराने की मांग उठानी पड़ी है।
वहीं अभिभावक संघ अध्यक्ष जसपाल राणा ने कहा कि वर्तमान में विद्यालय में 300 से अधिक छात्राएं अध्ययनरत हैं। विद्यालय में समय-समय पर खेलकूद प्रतियोगिताएं और अन्य गतिविधियां भी आयोजित होती हैं, जिनके दौरान भवनों की कमी महसूस होती है। इस समस्या से कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक छात्र-छात्राओं की सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं के हितों को देखते हुए अब क्षेत्रीय जनता और अभिभावकों को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
