आक्रोश: कुमाऊं में बुधवार से थम जाएंगे 50 हजार टैक्सियों के पहिये, वाहन फिटनेस की पुरानी व्यवस्था बहाल करने की है मांग

आक्रोश: कुमाऊं में बुधवार से थम जाएंगे 50 हजार टैक्सियों के पहिये, वाहन फिटनेस की पुरानी व्यवस्था बहाल करने की है मांग
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हल्द्वानी। कुमाऊं के सभी दस आरटीओ कार्यालयों में वाहनों की फिटनेस सेवा बंद होने के विरोध में टैक्सी संचालकों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। महासंघ टैक्सी यूनियन कुमाऊं मंडल ने चेतावनी दी है कि यदि पूर्व व्यवस्था बहाल नहीं की गई तो चार फरवरी से अनिश्चितकालीन चक्काजाम किया जाएगा, जिससे करीब 50 हजार टैक्सियों के पहिये थम सकते हैं। यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोज भट्ट के अनुसार ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) की अनिवार्यता ने आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है और निजी केंद्रों पर निर्भरता से शोषण की स्थिति बन रही है। संगठन ने कुमाऊं के सभी जिलाधिकारियों व परिवहन अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर फिटनेस जांच का अधिकार दोबारा सरकारी परिवहन कार्यालयों को देने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक प्रत्येक संभागीय कार्यालय में सरकारी फिटनेस सेंटर स्थापित नहीं होते, तब तक पुरानी व्यवस्था लागू रखी जाए। पहले हल्द्वानी, अल्मोड़ा समेत रामनगर, रुद्रपुर, काशीपुर, चम्पावत, टनकपुर, पिथौरागढ़, रानीखेत और बागेश्वर में यह सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन मिनिस्ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे (मोर्थ) द्वारा ऑनलाइन फिटनेस व्यवस्था बंद किए जाने से हजारों वाहन स्वामी प्रभावित हैं। भट्ट ने बताया कि चक्का जाम को लेकर ट्रक, बस एवं अन्य व्यावसायिक वाहन संघों से भी समर्थन जुटाया जा रहा है। मुनस्यारी के वाहन फिटनेस के लिए आ रहे हल्द्वानी पहाड़ी जिलों के चालक-मालिकों का कहना है कि उन्हें मुनस्यारी, कपकोट जैसे दूरस्थ इलाकों से हल्द्वानी, टनकपुर और रुद्रपुर स्थित निजी एटीएस केंद्रों तक फिटनेस कराने के लिए बार-बार जाना पड़ रहा है, जिससे समय और धन दोनों का नुकसान हो रहा है।
टैक्सी यूनियन की मुख्य मांगें:: –
– एटीएस फिटनेस अनिवार्यता तत्काल समाप्त की जाए।
– सभी आरटीओ/एआरटीओ कार्यालयों में सरकारी फिटनेस सेंटर फिर से शुरू हों।
– सरकारी व्यवस्था लागू होने तक पुरानी फिटनेस प्रणाली बहाल रहे।
– नैनीताल में बाहरी राज्यों की व्यावसायिक टैक्सियों के प्रवेश पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगे।
– पूर्व में जारी यात्रीकर माफी शासनादेश पुन: लागू हो।
– ऑनलाइन चालान व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जाए।
– पैनिक बटन और जीपीएस अनिवार्यता तब तक स्थगित रहे, जब तक प्रभावी मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित न हो।

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