हालात: पूर्व विधायक मनोज रावत ने लिया गौरीकुंड आपदा से हुई तबाही का जायजा, उन्हीं के शब्दों में पढ़िए आंखों देखा हाल

हालात: पूर्व विधायक मनोज रावत ने लिया गौरीकुंड आपदा से हुई तबाही का जायजा, उन्हीं के शब्दों में पढ़िए आंखों देखा हाल
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‘कांग्रेस के साथियों के साथ गौरीकुंड के आपदा ग्रस्त स्पॉट को देखकर आया । ऐसा लग रहा है कि वहां से एक शातिर मौन बरबादी गुजरी है, जिसकी चपेट में आने वालों की संख्या, जितने मुंह हैं उतनी है। कोई 19 बताता है कोई 22 तो कुछ लोगों का मानना है कि 25 से ऊपर हैं। जिन 3 अस्थाई दुकानों और एक स्टोर का नामोनिशान अचानक हुए भूस्खलन से मिट गया उनके भीतर उस रात 11.18 मिनट कितने लोग थे कोई नहीं बता पा रहा है। जो 3 शव मिले हैं वे नेपाली मूल के प्रतीत होते हैं, पर वे प्रशासन की पहली वाली गिनती में नहीं थे। वे सूची से हटकर हैं । कुछ स्थानीय लोग भी गायब हैं और यात्री भी उस रात चल रहे थे। नेपालियों की संख्या भी अभी कोई नहीं बता पा रहा है क्योंकि आजकल कुछ नए नेपाली मजदूर भी आ रहे थे।


कुल मिलाकर बड़ी तबाही और नुकसान हुआ है, जिसका सही आंकलन किसी के पास नहीं है । स्थानीय की बात करें तो अभी तक रुद्रप्रयाग जिले के 4 निवासियों के लापता होने की पुख्ता सूचना है। यह संख्या बढ़ भी सकती है।
इस बरबादी के ऊपर प्रशासन ने मुख्यमंत्री के दौरे से पहले कुछ दर्जन अस्थाई दुकानों को उजाड़ दिया है। इनमें से अधिकांश के मालिक आजकल यात्रा कम होने के कारण अपनी दुकानें नौकरों के भरोसे छोड़ कर अपने घरों को गए थे। उनका लाखों का सामान बरबाद हो गया है । उनके आंसू थम नहीं रहे हैं।


माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी, आपकी इंतजारी थी पर पर आप नहीं आ पाए। आप आते तो अपने अनुभव से आपसे कुछ निवेदन करते। सुना है कि कोई नौकरशाह आ रहे हैं । इन स्टील के फ्रेम वाले फौलादी दिल के नौकरशाहों से क्या कहें ? आपदा के दर्द को नियम-कानून और शासनादेशों से काम करने वालों को नहीं समझाया जा सकता है।
इसलिए आपसे निवेदन है –

1- समस्त संभावित गायब लोगों की सूची बनाई जाए। स्थानीय के अलावा नेपाली और यात्रियों के बारे में भी व्यापक प्रचार -प्रसार किया जाय।

2- कानूनी प्रक्रिया से गायब लोगों को न्यायिक रूप से मृत घोषित करने में 7 साल लगेंगे , इसलिए 2013 की आपदा की तरह गायब लोगों को मृत घोषित करने की प्रक्रिया को पुनर्जीवित किया जाय।

3- गायब लोगों को फौरी सहायता और मुआवजा कैसे दिया जाय, इसका रास्ता तलाश किया जाय।

इस संबंध में पक्ष- विपक्ष का भाव छोड़कर पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय हरीश रावत की सलाह लें तो अच्छे नतीजे आएंगे। हमसे भी सरकार और प्रशासन जो सहयोग चाहेगा हम देंगे।
उन्होंने इससे बड़ी तीव्रता और नुकसान वाली 2013 की आपदा के बाद केदारघाटी को फिर से बसाया-संवारा और यात्रा के लायक बनाया था।


इस दौरान पीड़ितों की माननीय नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य जी से भी बात करवाई । माननीय नेता प्रतिपक्ष ने आश्वासन दिया कि जल्दी माननीय मुख्यमंत्री जी से मिलकर पीड़ितों की पीड़ा रखेंगे और इन सभी तकनीकी समस्याओं का हल खोजेंगे।
हमारे कई बरिष्ठ साथी और जिला पंचायत सदस्यगण जिले से बाहर हैं। अतः धन्यवाद कांग्रेस के केदारनाथ विधानसभा के युवा अध्यक्ष करमवीर सिंह कुंवर, वरिष्ठ कांग्रेसी एवं टैक्सी यूनियन अध्यक्ष प्रकाश पंवार , NSUI रुद्रप्रयाग के तनुज पुरोहित और साथी विनोद सती आदि का, इस खराब मौसम और कठिन परिस्थितियों में साथ चलने और लोगों का दर्द जानने के लिए।
आगे भी अपडेट करता रहूंगा… आपदा और केदारघाटी के दर्द आपके साथ साझा करूँगा।

मनोज रावत
पूर्व विधायक, केदारनाथ

(फेसबुक पोस्ट)

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