समारोह: आईटीबीपी की आठवीं वाहिनी गौचर में धूमधाम से मनाया गया 65वां स्थापना दिवस

समारोह: आईटीबीपी की आठवीं वाहिनी गौचर में धूमधाम से मनाया गया 65वां स्थापना दिवस
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चमोली। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की आठवीं वाहिनी गौचर में शनिवार को 65वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। वाहिनी परिसर स्थित परेड ग्राउंड में आयोजित समारोह में कमांडेंट मनोहर सिंह रावत ने परेड की सलामी ली। इस अवसर पर उन्होंने हिमवीरों, अधिकारियों और उनके परिजनों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए बल की गौरवशाली परंपराओं, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को दोहराया।
समारोह को संबोधित करते हुए कमांडेंट मनोहर सिंह रावत ने कहा कि आईटीबीपी का गठन 24 अक्टूबर, 1962 को भारत-चीन युद्ध के बाद देश की उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा के उद्देश्य से किया गया था। छह दशक से अधिक के अपने गौरवशाली सफर में बल ने दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के बीच देश की सीमाओं की निगरानी और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


उन्होंने कहा कि हिमवीर विषम परिस्थितियों में भी पूरी मुस्तैदी, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के साथ सीमाओं की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। बर्फीले पहाड़ों, दुर्गम रास्तों और अत्यधिक ठंड के बावजूद जवानों का देश की सुरक्षा के प्रति समर्पण बल की सबसे बड़ी ताकत है। आईटीबीपी केवल सीमा सुरक्षा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आंतरिक सुरक्षा, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों तथा धार्मिक और पर्यटन स्थलों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही है।
कमांडेंट रावत ने उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए आठवीं वाहिनी पुलिस एवं प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर अपनी जिम्मेदारियां निभा रही है। चारधाम यात्रा जैसे चुनौतीपूर्ण आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराने में बल की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उन्होंने हिमवीरों से बल की गौरवशाली परंपराओं को बनाए रखने, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने तथा राष्ट्र की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। समारोह के दौरान जवानों ने देश की सीमाओं की रक्षा और जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
स्थापना दिवस समारोह ने बल के गौरवशाली इतिहास, साहस, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना को रेखांकित किया।

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