नज़रिया: आखिर तमिलों पर क्यों नहीं चल पा रहा है बीजेपी का जादू ?

नज़रिया: आखिर तमिलों पर क्यों नहीं चल पा रहा है बीजेपी का जादू ?
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साकेत आहूजा  
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कितनी ही बार तमिल भाषा, साहित्य और संस्कृति की प्रशंसा की। अपने भाषण में तमिल संत तिरूवल्लुवर का उल्लेख किया।  संसद में तमिलनाडु से आया हुआ ऐतिहासिक धर्मदंड (सेंगोल) स्थापित किया और देशवासियों को बताया कि प्रथम प्रधानमंत्री पं नेहरू ने किस तरह सेंगोल की उपेक्षा की थी।  इतना सब करने के पीछे राजनीतिक उद्देश्य यह भी था कि तमिल जनता का मन जीता जाए और तमिलनाडु में बीजेपी का आधार बनाया जाए।
इतनी उठापटक के बाद भी तमिल नेतृत्व बहलाने-फुसलाने की कोशिशों से प्रभावित नहीं हुआ और कुछ मुद्दों पर अपने स्टैंड पर दृढ़ता से कायम है।  परिसीमन को लेकर तमिलनाडु ही नहीं, सभी दक्षिणी राज्यों को आशंका है कि लोकसभा में घनी आबादी के हिंदी भाषी राज्यों की सीटें काफी बढ़ जाएंगी और जनसंख्या नियंत्रण करनेवाले दक्षिणी राज्यों को इसका खामियाजा उठाना पड़ेगा।  इसके अलावा नई शिक्षा नीति व त्रिभाषा फार्मूले को लेकर भी टकराव बना हुआ है।
डीएमके प्रमुख व तमिलनाडु के सीएम स्टालिन ने राज्य पर हिंदी भाषा लादने का आरोप लगाते हुए भाषा युद्ध की चेतावनी दे डाली।  इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि डीएमके बेईमान है।  वह तमिलनाडु के छात्रों का भविष्य बर्बाद कर रही है।  डीएमके सांसद टी।  सुमति ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु को पीएमश्री योजना के तहत दी जानेवाली 2,000 करोड़ रुपए की केंद्रीय राशि अन्य राज्यों को हस्तांतरित कर दी गई है।  प्रधान का तर्क था कि अगर तमिलनाडु सरकार समझौते के रास्ते पर सहमत होती है तो उसे पीएमश्री आवंटन देने में कोई आपत्ति नहीं है।  डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा कि तीन भाषा नीति तमिलनाडु के लोगों को स्वीकार्य नहीं है।
धर्मेंद्र प्रधान के ‘बेईमान’ शब्द का इस्तेमाल करने से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भड़क उठे।  उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री अपने शब्दों पर ध्यान दें।  आपने हमारा फंड रोककर हमें धोखा दिया है और हमारे सांसदों को असभ्य बता रहे हैं।  इस तरह की तीखी बहस और बिगड़ रहे माहौल से बीजेपी में चिंता है क्योंकि अगले वर्ष तमिलनाडु विधानसभा का चुनाव है।  गत वर्ष लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने तमिलनाडु में कुछ सीटों पर सफलता पाई थी और वहां अपना आधार बनाने में लगी थी।
डीएमके ने भाषा विवाद के भावनात्मक मुद्दे को हवा देकर बीजेपी को परेशानी में डाल दिया है।  केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने कहा कि अभी 20 दिनों का समय बाकी है इस दौरान पीएमश्री समझौते पर तमिलनाडु को हस्ताक्षर करना चाहिए।  प्रधान के माफी मांगने और अपने शब्द वापस लेने पर स्पीकर ने उस शब्द को संसद की कार्यवाही से हटा दिया।
(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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