धोखाधड़ी: कारोबार के नाम पर पत्नी से 50 लाख की धोखाधड़ी करने में पति समेत तीन पर मुकदमा दर्ज़

धोखाधड़ी: कारोबार के नाम पर पत्नी से 50 लाख की धोखाधड़ी करने में पति समेत तीन पर मुकदमा दर्ज़
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देहरादून(आरएनएस)।  एक महिला से अपने पति और ससुरालियों पर 50 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। आरोप है कि पति ने अपनी पार्टनरशिप फर्म के लिए पत्नी और ससुर से यह रकम ली थी। बाद में इसे वापस करने से इनकार कर दिया और बिना सहमति के इस रकम का इस्तेमाल अपने एक अन्य आपराधिक मामले के सेटलमेंट में कर लिया। मामले में शनिवार को राजपुर थाना पुलिस केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। राजपुर रोड निवासी सलोनी गोयनका ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनका विवाह 29 जनवरी 2019 को दिल्ली के हौजखास निवासी सिमरन सोढ़ी के साथ हुआ था।
पति ने पत्नी को धोखे में रखा
उनके पति, ससुर सरनजीत सिंह सोढ़ी और एक अन्य महिला बानी आहूजा मैसर्स लिट प्लास्टो टेक नाम से एक पार्टनरशिप फर्म चलाते हैं। आरोप है कि तीनों ने साजिश के तहत सलोनी और उनके परिवार का विश्वास जीता। इसके बाद 16 अगस्त 2023 को सिमरन सोढ़ी ने व्हाट्सएप पर मैसेज कर सलोनी पर अपने पिता गोपाल गोयनका से 50 लाख रुपये मंगवाकर फर्म के खाते में ट्रांसफर करने का दबाव बनाया। तहरीर के मुताबिक सिमरन ने पत्नी को व्हाट्सएप पर भरोसा दिया था कि यह 50 लाख की रकम उसके पिता सरनजीत सिंह की ओर से 25-25 लाख की दो किश्तों में जल्द लौटा दी जाएगी। पति के झांसे में आकर सलोनी ने अपने पिता से मंगवाए गए 50 लाख रुपये 16 अगस्त 2023 को ही आरटीजीएस के माध्यम से आरोपियों के कहने पर उनकी फर्म के एचडीएफसी बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद आरोपियों ने रकम लौटाने से इनकार कर दिया। पीड़िता के मुताबिक उक्त रकम ट्रांसफर करने के बाद उनके खाते में मात्र 2.60 लाख रुपये ही शेष बचे थे। एसओ राजपुर पीडी भट्ट ने बताया कि आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।
दूसरे मुकदमे के सेटलमेंट में खपाए पत्नी के पैसे
पीड़िता का आरोप है कि पति और ससुर ने उक्त 50 लाख रुपये का इस्तेमाल दिल्ली के वसंत कुंज नॉर्थ थाने में दर्ज अपने एक पुराने आपराधिक मुकदमे के समझौते के भुगतान में कर लिया। महिला का ससुराल पक्ष से विवाद चल रहा है। देहरादून के पारिवारिक न्यायालय में चल रहे भरण-पोषण के मुकदमे में आरोपियों ने इसे व्यावसायिक शर्तों पर लिया गया उधार बताया, जबकि कानूनी नोटिस के जवाब में इसे बिना ब्याज का मैत्रीपूर्ण ऋण करार दिया। एसओ पीडी भट्ट ने बताया कि तथ्यों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है।

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