चेतावनी: सड़क निर्माण में अधिग्रहित भूमि का मुआवजा जल्द न मिला तो आंदोलन करेंगे ग्रामीण

चेतावनी: सड़क निर्माण में अधिग्रहित भूमि का मुआवजा जल्द न मिला तो आंदोलन करेंगे ग्रामीण
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देहरादून (आरएनएस)। सत्ता परिवर्तन के साथ उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड अलग हुए 26 साल बीत चुके हैं, लेकिन जिले के चकराता-खारसी मोटर मार्ग के निर्माण में अपनी भूमि,गूल और फसल गंवाने वाले ग्रामीण आज भी मुआवजे के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। वर्ष 1992 में निर्मित मोटर मार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण और नुकसान के बावजूद करीब 34 वर्ष बाद भी ग्रामीणों को मुआवजा नहीं मिल पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने लोक निर्माण विभाग से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक गुहार लगाई और कई स्तरों से मुआवजा देने के निर्देश भी जारी हुए, लेकिन आज तक उनके हाथ खाली हैं।ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1992 में चकराता-खारसी मोटर मार्ग के निर्माण के दौरान करीब 19 ग्रामीणों की गूल, उपजाऊ भूमि और फसलें प्रभावित हुई थीं। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद से ही ग्रामीण मुआवजे के लिए विभागीय अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजे के इंतजार में उनकी दूसरी पीढ़ी भी उम्रदराज हो चुकी है, लेकिन उन्हें उनकी जमीन और फसल के नुकसान का भुगतान नहीं मिला। ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग से मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द मुआवजा जारी करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द मुआवजा नहीं दिया गया तो वे लोक निर्माण विभाग के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने बताया कि अप्रैल माह में अधीक्षण अभियंता ने भी मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।

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