असर: बेमौसमी बर्फबारी से ग्लेशियर और वनों को मिला फायदा, वनाग्नि की घटनाओं में आई कमी

असर: बेमौसमी बर्फबारी से ग्लेशियर और वनों को मिला फायदा, वनाग्नि की घटनाओं में आई कमी
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देहरादून। भले ही बेसौमी बारिश और बर्फबारी ने चारधाम यात्रा सहित प्रदेश के जनजीवन को प्रभावित करने का काम किया है। लेकिन अप्रैल-मई में हुई बर्फबारी से ग्लेशियर रिचार्ज होने के साथ वनों को भी फायदा हुआ। 15 फरवरी से प्रदेश में फायर सीजन शुरू हो जाता है। लेकिन, इस साल अप्रैल-मई में हुई बारिश और बर्फबारी से वनों में आग लगने की घटना कम देखने को मिलीं।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तराखंड के 23 साल के इतिहास में इस बार ऐसा पहली बार हुआ जब सर्दियों के मौसम में एक बार भी बर्फबारी नहीं हुई। सामान्य तौर पर सर्दियों के दिनों में प्रदेश में 101.7 फीसदी, मानसून से पहले 158.2, मानसून में 1162.7 और मानसून के बाद 55 फीसदी बारिश होती है। लेकिन इस साल के मार्च-अप्रैल में हुई बारिश का आंकड़ा सामान्य बारिश से 41 फीसदी अधिक है। यानी प्री-मानसून की बारिश में इजाफा दर्ज किया गया। जनवरी में सामान्य तौर पर 6.1 इंच और फरवरी में 8.9 इंच बर्फबारी होती है। लेकिन इस साल यह आंकड़ा शून्य रहा।

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