अभियान: मोहान क्षेत्र में महिला को शिकार बनाने वाले बाघ की तलाश तेज, वन विभाग की कई टीमें डटीं
अल्मोड़ा(आरएनएस)। मोहान वन क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग ने अभियान तेज कर दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में लगातार गश्त, निगरानी और बाघ को रेस्क्यू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। वन विभाग के एसडीओ काकुल पुंडीर ने बताया कि ग्राम सभा डबरा सौराल, तड़म और काठ की नाव क्षेत्र में उप प्रभागीय वनाधिकारी रानीखेत के निर्देशन में गठित टीमें लगातार कैंप कर रही हैं। वन्यजीव की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ही उसे सुरक्षित रेस्क्यू करने के प्रयास जारी हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में बाघ के पगमार्ग और अन्य गतिविधियों की पहचान की जा रही है। वन विभाग ने डबरा सौराल और सौराल गांव के रास्तों एवं पगडंडियों पर झाड़ियों की कटाई कराई है, ताकि आवाजाही सुरक्षित हो सके। वन क्षेत्राधिकारी मोहान के नेतृत्व में टीम ने ग्रामीणों से संवाद कर उन्हें सतर्क रहने के लिए जागरूक किया। विभाग की निगरानी में स्कूली बच्चों को सुरक्षित विद्यालय पहुंचाया गया। बाघ की निगरानी के लिए क्षेत्र में सात पिंजरे लगाए गए हैं। इसके अलावा दो ड्रोन, दो लाइव कैमरे, 33 कैमरा ट्रैप, ट्रैंक्विलाइजर उपकरण, सात फ्लैश लाइट, राइफल और गांधी बंदूक सहित अन्य संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है। गश्ती दल नियमित रूप से सभी उपकरणों की जांच कर वन्यजीव की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। इसके साथ ही विभाग ग्रामीणों को जागरूक कर रहा है। बाघ के रेस्क्यू अभियान में कॉर्बेट की विशेषज्ञ टीम के साथ चिकित्सकों की टीम भी लगातार सहयोग कर रही है। वन विभाग के अनुसार अभियान में रामनगर वन प्रभाग, कालागढ़ टाइगर रिजर्व तथा अल्मोड़ा वन प्रभाग की रानीखेत, जौरासी, द्वाराहाट और अल्मोड़ा रेंज की टीमें संयुक्त रूप से क्षेत्र में कैंप कर निगरानी और रेस्क्यू अभियान में जुटी हुई हैं।

