अनदेखी: राफ्टिंग के रोमांच के बीच नियमों की अनदेखी, पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा पर सवाल
ऋषिकेश। देशभर में राफ्टिंग के लिए प्रसिद्ध ऋषिकेश में गंगा की लहरों पर रोमांच का सीजन शुरू हो चुका है। रोजाना बड़ी संख्या में पर्यटक राफ्टिंग के लिए पहुंच रहे हैं और इसके साथ ही स्थानीय पर्यटन कारोबार भी रफ्तार पकड़ रहा है। लेकिन पर्यटकों की बढ़ती आमद के बीच राफ्टिंग कारोबार की निगरानी और राफ्टिंग एवं क्याकिंग नियमावली-2024 के क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ऋषिकेश, मुनिकीरेती और लक्ष्मणझूला क्षेत्र में 262 राफ्टिंग कंपनियां पंजीकृत हैं। इन दिनों रोजाना करीब 1000 से 2500 पर्यटक राफ्टिंग का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। तीन महीने तक प्रभावित रहे कारोबार में अब तेजी लौट रही है। इसके बावजूद पर्यटकों को बुकिंग से लेकर राफ्टिंग प्वाइंट तक पहुंचाने की व्यवस्था में अनाधिकृत एजेंटों की भूमिका चर्चा में है।
आइएसबीटी से तपोवन तक एजेंटों का जाल
ऋषिकेश आइएसबीटी, मुनिकीरेती, तपोवन, स्वर्गाश्रम और लक्ष्मणझूला क्षेत्र में राफ्टिंग बुकिंग के नाम पर बड़ी संख्या में एजेंट सक्रिय बताए जा रहे हैं। आरोप है कि कई एजेंट पर्यटकों से सीधे कंपनी के बजाय अपने स्तर पर सौदे करते हैं और इसके बाद उन्हें अलग-अलग राफ्टिंग कंपनियों तक पहुंचाया जाता है।
ऐसे में पर्यटक को यह जानकारी तक नहीं होती कि वह जिस व्यक्ति से बुकिंग कर रहा है, वह संबंधित कंपनी का अधिकृत प्रतिनिधि है या नहीं। अधिक शुल्क वसूले जाने अथवा सेवा में कमी की स्थिति में पर्यटक के सामने शिकायत की समस्या भी खड़ी हो सकती है।
ऑनलाइन कंपनियां, लेकिन जमीन पर कार्यालय नहीं
राफ्टिंग कारोबार में ऑनलाइन बुकिंग का चलन भी बढ़ रहा है। कई कंपनियां इंटरनेट और फोन के माध्यम से बुकिंग ले रही हैं। बुकिंग के बाद एजेंट आइएसबीटी अथवा रेलवे स्टेशन से पर्यटकों को राफ्टिंग प्वाइंट तक पहुंचाते हैं।
सवाल यह है कि यदि किसी कंपनी का मौके पर भौतिक कार्यालय ही नहीं है तो शिकायत की स्थिति में पर्यटक संबंधित कंपनी तक कैसे पहुंचेगा। यही स्थिति विभागीय अधिकारियों के लिए भी कंपनियों और उनके एजेंट नेटवर्क की वास्तविक निगरानी को चुनौतीपूर्ण बनाती है।
नियमावली में स्पष्ट हैं मानक
रिवर राफ्टिंग एवं क्याकिंग नियमावली-2024 में कंपनियों के संचालन को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। प्रत्येक राफ्टिंग कंपनी का अलग कार्यालय होना, कार्यालय के स्वागत कक्ष और कैंप में शिकायत एवं सुझाव पुस्तिका रखना तथा पंजीकृत कंपनी या फर्म के नाम का साइन बोर्ड लगाना अनिवार्य है।
किराये के कार्यालय की स्थिति में किरायानामा प्रस्तुत करना भी आवश्यक है। इसके साथ ही राफ्टिंग उपकरणों का नियमित सुरक्षा ऑडिट और असुरक्षित अथवा जीर्ण-क्षीर्ण उपकरणों को बदलना भी नियमों में शामिल है।
सवाल यह है कि निगरानी कौन कर रहा है?
जब नियमावली में कंपनी के कार्यालय से लेकर सुरक्षा उपकरणों तक के मानक तय हैं, तो इनका धरातल पर कितना पालन हो रहा है, यह जांच का विषय है। कितनी कंपनियों का भौतिक सत्यापन हुआ? कितनी कंपनियों के कार्यालय मौके पर मिले? कितने अनाधिकृत एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई हुई? पर्यटकों से अधिक शुल्क वसूली की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई? इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।
पर्यटन सीजन में पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ ही यह मामला और महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि राफ्टिंग केवल पर्यटन कारोबार नहीं बल्कि सीधे तौर पर पर्यटकों की सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़ा विषय है।

