बड़ी खबर: किसान आंदोलन समाप्त, अब घरों को लौटेंगे बार्डर पर जमे किसान
नई दिल्ली, 09 दिसंबर।
हेलिकॉप्टर दुर्घटना में सीडीएस जनरल विपिन सिंह रावत व उनकी पत्नी समेत 13 सैन्य ऑफिशियल के मारे जाने की दुखद घटना को लेकर व्याप्त गमगीन माहौल के बीच गुरुवार को एक बड़ी खबर आई है।
News debate.com में प्रकाशित एक न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की सीमाओं पर बीते 14 महीनों से डटे किसानों ने आंदोलन समाप्त कर दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने खुद आज इसका ऐलान किया है। इससे पहले मोर्चा ने लंबी बैठक की, जिसके बाद घर वापसी पर फैसला लिया गया। संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया कि दिल्ली बॉर्डर से किसान 11 दिसंबर से हटने शुरू करेंगे। उसके बाद 13 दिसंबर को अमृतसर में हरमंदिर साहिब पर मात्था टेकेंगे। वहीं, 15 दिसंबर से पंजाब के टोल प्लाजा पर डटे हुए किसान भी हट जाएंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, किसान नेता बलवीर राजेवाल ने कहा कि हम सरकार को झुकाकर वापस जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 15 जनवरी को किसान मोर्चा की फिर बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।

वहीं दूसरी तरफ दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों ने भी ‘घर वापसी’ की तैयारी शुरू कर दी है। News debate के अनुसार, सिंघु-कुंडली बॉर्डर पर पिछले एक साल से डटे किसान अब लौटने लग गए हैं। किसानों ने बॉर्डर पर बनाए अपने टेंट को उखाड़ना शुरू कर दिया है और तिरपाल, बिस्तर को ट्रकों-ट्रैक्टरों में रखना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि सरकार ने उनकी मांगों को मान लिया है, इसलिए अब वो वापस लौट रहे हैं। राजेवाल ने कहा कि मैं उन सभी लोगों को धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने हमारा इस लंबी लड़ाई में समर्थन दिया है।
गौरतलब है कि किसानों और सरकार के बीच इस सप्ताह की शुरुआत से ही बात चल रही थी। मंगलवार को सरकार ने किसानों को एक चिट्ठी भेजी थी। इसमें एमएसपी पर कमेटी बनाने, मुआवजे पर सैद्धांतिक सहमति और आंदोलन खत्म करने पर मुकदमों की वापसी की बात कही गई थी। इस पर किसानों ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि मुकदमे आंदोलन की समाप्ति के बाद नहीं बल्कि पहले ही हटाए जाएं। इसके बाद सरकार ने नया प्रस्ताव किसानों को भेजा और तत्काल प्रभाव से मुकद्दमों की वापसी की बात कही। सरकार के नए प्रस्ताव पर संगठन राजी हो गए और आंदोलन खत्म करने का फैसला लिया गया।

