विमर्श: राज्य के ‘जनसरोकारों पर बात’ विषय पर आयोजित बैठक में चिंतन-चर्चा

विमर्श: राज्य के ‘जनसरोकारों पर बात’ विषय पर आयोजित बैठक में चिंतन-चर्चा
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प्रदेश की दिशा-दशा को लेकर बनाया जायेगा प्रेशर ग्रुप

संवाददाता
देहरादून, 11 सितम्बर।
राज्य के जनसरोकारों को लेकर एक बैठक कचहरी रोड, देहरादून में सम्पन्न हुई, जिसमें तय किया गया कि राज्य की दिशा-दशा को लेकर एक प्रेशर ग्रुप बनाया जायेगा। इसमें जनसंघर्षो से जुड़े लोगों को लेकर एक जनपक्षीय मांग पत्र को बनाकर विभिन्न राजनैतिक दलों के नेताओं को सौंपा जायेगा। पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत के सलाहकार सुरेन्द्र कुमार की पहल पर उपरोक्त बैठक का आयोजन उनके चौपाल कार्यालय में किया गया। बैठक का थीम ही ‘जनसरोकारों पर बात’ रखा गया था। सभा में बोलते हुए समाजसेवी रतन सिंह असवाल ने कहा कि उत्तराखंड बने बीस वर्ष में भी पर्वतीय क्षेत्रों में अभी भी विकास दूर की बात है। उन्होंने कहा कि पलायन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सेवाओं का बुरा हाल है। उनके द्वारा तैयार किये गये कई शोध पत्रों को सम्बन्धित अधिकारी व नेताओं ने सौंपे जाने के बाद भी तवज्जो नहीं दी है। समाजसेवी व अपने सैद्धांतिक विचारों के लिये चर्चित बुद्विजीवी सुरेन्द्र सिंह आर्य ने राजनीति के कई विरोधाभाषों को इंगित करते हुए कहा कि हमें राजनैतिक व शासन के कार्यों में लोकतंत्र की भावनाओं में एकरूपता लानी होगी। राजनीति के गिरते स्तर पर उन्होंने अपनी चिन्ता प्रकट की। वनाधिकार आन्दोलन से जुड़े प्रेम बहुखंडी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की भौगोलिक स्थिति बड़े विकास मॉडल के लिये उपयुक्त नहीं है। हमें विकास का छोटा मॉडल जैसे, छोटा स्कूल, छोटा अस्पताल के साथ-साथ अपने ग्रमीण क्षेत्र की छोटी ईकाईयों को प्रभावी करना होगा, जिससे दूरुस्थ क्षेत्रों में लोगों को देहरादून, हरिद्वार व नैनीताल जैसे शहरों में भागने से बचाया जा सके। कामरेड जगदीश कुकरेती व गिरधर पंडित ने पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन व रोजगार पर अपनी गम्भीर चिन्ता प्रकट की। ‘जनसरोकारों पर बात’ की अगली बैठक अगले माह करना तय पाया गया।

बैठक की अध्यक्षता एक्टिविस्ट जयप्रकाश उत्तराखंडी ने की व संचालन ‘जनसरोकारों पर बात’ के संयोजक व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के सलाहकार सुरेन्द्र कुमार द्वारा किया गया। डॉ एस एन सचान व डॉ डी एन भटकोटी ने मोबाईल के माध्यम से बैठक के प्रति अपने समर्थन व सहयोग की सहमति प्रदान की। बैठक में प्रेम बहुखंडी, सुरेन्द्र आर्य, जयप्रकाश उत्तराखंडी, अशोक वर्मा, गोदावरी थापली, ललित पंत, नेमचन्द, राजेन्द्र धवन, प्रदीप डोभाल, अनिल बस्नेत, परमजीत सिंह, प्रदीप जोशी, सतीश धोलाखंडी, डॉ संजीव शर्मा, साधना शर्मा, बलबीर राणा, पी एन लखेड़ा, रतन सिंह असवाल, अब्दुल रहमान, राकेश डोभाल व मदन लाल आदि ने मुख्य रूप से भाग लिया।

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