आफ़त : जंगली हाथियों के आतंक से परेशान हैं ग्रामीण, फसलों को कर रहे हैं बर्बाद

आफ़त : जंगली हाथियों के आतंक से परेशान हैं ग्रामीण, फसलों को कर रहे हैं बर्बाद
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ऋषिकेश। ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीवों के आतंक से ग्रामीण त्रस्त हैं। हाथी और गुलदार की लगातार आबादी क्षेत्रों में आवाजाही से मानव वन्यजीव संघर्ष का खतरा लगातार बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश गांव राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर और ऋषिकेश की बड़कोट रेंज से सटे हैं। विभागीय अधिकारियों की सख्ती के चलते ग्रमीणों का पार्क क्षेत्र में चारा और लकड़ी के लिए जाना पूरी तरह से बंद है, लेकिन वन्यजीवों की आबादी क्षेत्र में लगातार आवाजाही बढ़ी है। हरिपुरकलां के सूरजपुर कालोनी, मोतीचूर, खांड गांव, मुर्गीफार्म, डांडी, खैरीखुर्द, नाबाबवाला, आशा प्लॉट, जोगीवाला माफी, गौहरिमाफी व साहबनगर के वन्यजीवों के आतंक से परेशान हैं। खांड गांव और जोगीवाला माफी में तो गुलदार गेट के अंदर सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हुए हैं। पार्क की सीमाएं खुली होने के कारण हाथी आबादी वाले क्षेत्रों में घुसकर काश्तकारों की फसल बर्बाद कर देते हैं। वन विभाग मुआवजा दिलाने की बात तो करता है, लेकिन उनकी मुआवजा की राशि कम और प्रक्रिया इतनी जटिल है कि किसान इससे दूरी बना लेते हैं। खैरीखुर्द के किसान हर्षपति सेमवाल ने कहा कि विभाग बजट न होने का बहाना बनाकर मुआवजे को तीन तीन सालों तक नहीं देते। जिससे ग्रामीण विभाग की मुआवजा नीति से दूरी बना लेते हैं।

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