नुक़सान: ज्यादा बारिश से करेले की पैदावार पर  असर, किसानों की चिंता बढ़ी

नुक़सान: ज्यादा बारिश से करेले की पैदावार पर  असर, किसानों की चिंता बढ़ी
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विकासनगर। मानसून की बारिश जहां फसलों के लिए अमृत मानी जाती है, वहीं कुछ सब्जियों के लिए नुकसानदायक भी बन सकती है। इन दिनों ज्यादा बारिश से करेले के फल पूरी तरह विकसित होने से पहले ही पीले पड़ रहे हैं, जिससे करेले की पैदावार पर सीधा असर पड़ रहा है और किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। यह समस्या खासतौर पर देहरादून के मैदानी क्षेत्रों में देखने को मिल रही है। इस स्थिति में करेला न तो पूरी तरह विकसित हो पाता है, न ही उसका स्वाद या औषधीय गुण बने रहते हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि समय से पहले फल पकना मौसमीय बदलाव, अधिक बारिश, पोषक तत्वों की कमी, और कीट-रोगों के प्रकोप के कारण हो सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र, ढकरानी के वैज्ञानिक डॉ. भूपेन्द्र सिंह खड़ायत बताते हैं कि लगातार बारिश से आवश्यक पोषक तत्व पोटाश और बोरान बह जाते हैं। इनकी कमी से करेले के पौधों में एथिलीन नामक हार्मोन अधिक बनने लगता है, जिस कारण फल जल्दी पकने लगते है। लगातार बादल और बारिश से पौधों में प्रकाश संश्लेषण भी कम होता है। अधिक नमी और बारिश में मधुमक्खियां और अन्य परागणकर्ता कम सक्रिय होते हैं, जिससे परागण ठीक से नहीं हो पाता और फल कमजोर होकर जल्दी पीले पड़ने लगते हैं।

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