आक्रोश: गेहूं खरीद शुरू न होने पर भड़के किसान, मंडी में प्रदर्शन कर जताया गुस्सा
रुद्रपुर। सरकारी कांटों पर गेहूं खरीद शुरू न होने से नाराज किसानों ने मंडी परिसर में प्रदर्शन किया। किसानों ने धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में किसानों ने नायब तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। बुधवार को आयोजित सभा में किसानों ने सरकार पर शोषण का आरोप लगाया। उनका कहना था कि क्षेत्र में एक अप्रैल को तौल कांटों के बैनर तो लगा दिए गए, लेकिन अब तक खरीद शुरू नहीं हुई। 50 प्रतिशत से अधिक गेहूं की कटाई हो चुकी है, जबकि खरीद मात्र 500 कुंतल ही दर्शाई जा रही है। किसानों को अपनी फसल बाजार में कम कीमत पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि दो अप्रैल को भी मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सरकारी खरीद प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की। जिलाध्यक्ष गुरनाम सिंह ने चेतावनी दी कि यदि जल्द खरीद शुरू नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस मौके पर जिला संयोजक जगीर सिंह, मंडल अध्यक्ष त्रिलोक सिंह, सुरेश सिंह, निशान सिंह, गुरदेव सिंह, संतोष सिंह, लक्ष्मण सिंह, लोहर सिंह, मनखुशी सिंह, अरुण सिंह, गुरमुख सिंह और अमरजीत सिंह मौजूद रहे।
गेहूं खरीद न होने पर विधायक ने जताई नाराजगी
उधर,खटीमा विधानसभा क्षेत्र में गेहूं खरीद केंद्रों पर खरीद शुरू न होने से उप नेता प्रतिपक्ष एवं विधायक भुवन कापड़ी ने नाराजगी जताई है। उन्होंने इसके लिए सरकार और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कड़ी आलोचना की। कापड़ी ने चेतावनी दी कि यदि जल्द खरीद शुरू नहीं हुई तो वे सड़कों पर जनआंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। विधायक कापड़ी ने कहा कि क्षेत्र में किसानों के साथ घोर लापरवाही और अन्याय हो रहा है। उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया और स्वयं मंडी परिसर पहुंचकर निरीक्षण भी किया, जहां गेहूं खरीद के लिए केंद्र तो स्थापित किए गए हैं, लेकिन अब तक सुचारू संचालन शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने इसे प्रशासन की लापरवाही और किसानों के प्रति असंवेदनशीलता बताया। उन्होंने कहा कि किसान दिन-रात मेहनत कर, कर्ज लेकर फसल तैयार करता है, लेकिन जब उसे बेचने का समय आता है तो उसे भटकना पड़ता है। यह स्थिति अस्वीकार्य है। कापड़ी ने कहा कि यदि जल्द सभी गेहूं क्रय केंद्र चालू कर खरीद शुरू नहीं की गई, तो वे बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
