आयोजन: श्री भोले जी महाराज के पावन जन्मोत्सव पर जनकल्याण समारोह शुरू
भगवान के भजन बिना मनुष्य जीवन व्यर्थ
बी.के.त्यागी
नई दिल्ली। प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु एवं द हंस फाउंडेशन के प्रेरणास्रोत श्री भोले जी महाराज के पावन जन्मोत्सव पर हंस ज्योति-ए यूनिट आफ हंस कल्चरल सेंटर द्वारा श्री हंसलोक आश्रम, छतरपुर दिल्ली में दो दिवसीय जनकल्याण समारोह का विधि विधान के साथ शुभारम्भ हुआ।
इस मौके देश-विदेश से आये हजारों श्रद्धालुओं एवं साधु-संतों को सम्बोधित करते हुए श्री भोले जी महाराज ने कहा कि भगवान की असीम कृपा से हमें यह मनुष्य शरीर मिला है, इसे व्यर्थ की बातों में नहीं गंवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय के सच्चे तत्वदर्शी महापुरुष सद्गुरु महाराज से भगवान के सच्चे नाम को जानकर भजन-सुमिरण करना चाहिए, तभी हमारा मानव जन्म सार्थक होगा। श्री भोले जी महाराज ने ‘..जीवन है बेकार भजन बिन दुनिया में तथा हंसा निकल गया पिंजड़े से खाली पड़ी रही तस्वीर’ आदि भजन गाकर लोगों को भक्ति मार्ग पर लगने के लिए प्रेरित किया।
आध्यात्मिक विभूति तथा द हंस फाउंडेशन की प्रेरणास्त्रोत माताश्री मंगला जी ने कहा कि अध्यात्म ज्ञान सभी धर्मग्रंथों और धर्मशास्त्रों का मूल है। आध्यात्म ज्ञान से ही देश की सभी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम, श्रीकृष्ण, भगवान बुद्ध, गुरु नानक, महावीर स्वामी, स्वामी विवेकानंद तथा श्री हंस जी महाराज आदि हमारे सभी संत-महापुरुष अध्यात्म ज्ञानी थे, इसलिए आज भी पूरी दुनिया में उनकी पूजा होती है।

माता श्री मंगला जी ने कहा कि गुरु दरबार में सत्संग और सेवा का बहुत बड़ा महत्व है। दरबार की कोई भी सेवा छोटी या बड़ी नहीं होती, जो भी सेवा आपको दी जाए, उसे पूरी निष्ठा, प्रेम और समर्पण भाव से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हनुमान जी, लक्ष्मण जी, भिलनी, केवट, अंगद तथा सुग्रीव आदि भक्तों ने प्रभु श्री राम की सच्चे प्रेम एवं भाव से सेवा की जिससे उनका नाम इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गया।
माताश्री मंगला जी ने कहा कि संत-महापुरुष बड़े परमार्थी होते हैं जो स्वयं कष्ट सहकर जीवन भर लोगों का कल्याण ही करते हैं। उन्होंने कहा कि संतों का काम समाज को जोड़ना होता है, तोड़ना नहीं। समारोह में देश के विभिन्न भागों से आये आत्मानुभवी संत-महात्माओं ने सत्संग विचारों से श्रद्धालुओं को लाभान्वित किया। प्रसिद्ध भजन गायकों ने भक्ति भाव के भजन प्रस्तुत कर श्रद्धालु-भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

