हालात: अब इसराइल के लोग भी नहीं चाहते कि गाजा में युद्ध हो, विश्व में अलग थलग पड़ने का दिख रहा खतरा

हालात: अब इसराइल के लोग भी नहीं चाहते कि गाजा में युद्ध हो, विश्व में अलग थलग पड़ने का दिख रहा खतरा
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अजय दीक्षित
जिस तरह की खबरें आ रही हैं वह यह दर्शाती हैं कि इसराइली भी नहीं चाहते कि गाजा में युद्ध हो क्योंकि गाजा में अब जेनोसाइट, भुखमरी हो रही है। इसे कोई भी सभ्य समाज स्वीकार नहीं करेगा लेकिन इज़राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू विश्व बिरादरी की छोड़ो अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की भी नहीं मान रहे हैं। जेनोसाइट माने नरसंहार।
बताया जाता है कि 2023 से हमास इसराइल युद्ध में 15000 पालिस्तीनी और 1500 इसराइल के लोग मारे गए हैं, जबकि हमास ने 52 इसराइली लोगों को बंधक बना रखा है। गाजा में भी फिलिस्टिनियों को इसराइल की सेना ने गोलान पहाड़ियों पर खदेड़ दिया है, जबकि वे पूरी गाजा पट्टी में रहते थे। कुल मिलाकर फिलिस्तीनी नागरिकों के लिए गोलान पहाड़ियों ही बची, बाकी पूरे देश पर इसराइली सेना का कब्जा है। अभी मानव अधिकारों का एक संगठन युद्ध क्षेत्र में गया और उसके साथ अंतरास्ट्रीय प्रेस भी थी, लेकिन इसराइल सेना ने इस प्रतिनिधित्व को गाजा के उस भाग में नहीं जाने दिया है।
बताया जाता है कि पूरा गाजा शहर भुतहा शहर बन गया है कोई भी इमारत बची नहीं है। खंडहर बन गया है गाजा।
इसराइल के पूर्व प्रधानमंत्री अलमारे ने कहा है कि अब इज़राइल को युद्ध रोक देना चाहिए। उन्होंने कहा कि युद्ध के भी नियम, कायदे, कानून,होते हैं। दरअसल अब बिना किसी उद्देश्य के युद्ध लड़ा जा रहा है, जबकि यूएनओ व यूएसए सहित अन्य इसराइल समर्थक देशों ने भी युद्ध समाप्त करने का सुझाव दिया है। इजरायली नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अगर युद्ध बंद नहीं किया तो इसराइल में सैनिक विद्रोह हो सकता है और विश्व में उसकी स्थिति ऐसी हो सकती है जैसे रंगभेद के समय 1991से पहले साउथ अफ्रीका की हो गई थी, जिसमें सभी देशों ने साउथ अफ्रीका को अलग कर दिया था। आखिर नेल्सन मंडेला को जेल से रिहा करना पड़ा और नए चुनाव हुए, रंगभेद नीति खत्म हुई, तब साउथ अफ्रीका वापिस मुख्य धारा में आया। गाजा में जो कुछ घटित हुआ है उसके लिए हमास भी जिम्मेदार है,
लेकिन गाजा में हुए जीनोसाइट से पश्चिमी देश, अमेरिका पल्ला नहीं झाड़ सकते क्योंकि इजरायल को हथियार तो इन देशों ने मुहैया कराए हैं। पूरी दुनियां में ईसाइयत के बाद इस्लाम के अनुयाई ही सबसे अधिक है, जबकि इसराइल यहूदी देश है। ईसाइयत और यहूदियों में अधिक अंतर नहीं है
बताया जाता है कि ईशा मसीह की मां मेरी यहूदी थी। इसलिए पश्चिमी देशों का समर्थन इज़राइल को मिलता है और इनके ही दम पर छोटे से देश इज़राइल ने मध्य एशिया में मुस्लिम देशों, जैसे लीबिया, सीरिया और लेबनान को पानी पिला दिया है।
हालांकि फिलिस्टिन भी कम जिम्मेदार नहीं है। गाजा में जो युद्ध चल रहा है, वह हमास ने ही शुरू किया था। 2023 में एक दिन में 1000से अधिक इजरायलियों को हमला कर मौत के घाट उतार दिया गया था लेकिन इसके बाद इज़राइल ने पूरे गाजा को खंडहर बना दिया और 15000 फलस्तीनी लोगों को मार डाला था। हमास के सुप्रीम कमांडर सैफुल्लाह भी मारा गया था। हमास एक तरह का आतंकवादी संगठन है, जैसे आई एस आई एस , अलकायदा, जैस-ए- तैयबा, हिजबुल, लश्कर-ए-तैयबा, बलूच आर्मी, यहां तक कि तालिबान भी एक आतंकवादी संगठनों में आता है। इस्लामिक देशों में बंदूक के बल पर शासन किया जाता है। इसीलिए इस्लामिक देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं कायम रह सकती है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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