आकलन: ईरान युद्ध से अमेरिका तो एग्जिट हो गया किंतु हॉर्मूज ईरान की गले की फांस बन गया है
अजय दीक्षित
युद्ध से सम्मानजनक एग्जिट हो गया अमेरिका और पाकिस्तान ने बिचौलिया बन कर ईरान को हॉर्मूज में फंसा दिया अब ईरान बिलबिला रहा है क्योंकि हॉर्मूज समुद्री क्षेत्र पर जो ब्लैक मेलिंग अमेरिका कर रहा था। वह अमेरिका करने लगा है और ईरान की पूरी इकॉनमी ध्वस्त होती जा रही है। ईरान की लीडरशिप में बिखराव की खबरें आ रही है।
उसकी तेल के संयंत्र निकासी या सप्लाई न होने के कारण बंद हो सकते हैं क्योंकि ईरान के पास स्टोरेज क्षमता तीस लाख बैरल की है ।वह पूरी भर चुकी है इस लिए उत्पादन बंद करने की नौबत आ गई है। पाकिस्तान और अमेरिका ने बड़ी चतुराई से युद्ध सीज फायर किया और एक सप्ताह में पहले दौर की बातचीत करली। बातचीत असफल हो गई तो अमेरिका ने एक तरफ से युद्ध बंद कर एग्जिट कर लिया।
जिस हॉर्मूज समुद्री क्षेत्र हथियार से ईरान ने खाड़ी देशों और भारत पाकिस्तान चाइना, सहित 75 देशों को गैस, क्रूड ऑयल के तरसा दिया था और वही हॉर्मूज गले की हड्डी बन गया है। क्योंकि अमेरिका ने हॉर्मूज समुद्री क्षेत्र की नाके बंदी करदी है। इससे ईरान के बंदरगाहों से तेल टैंकरों से तेल नहीं निकल रहा है। हालांकि परेशान खाड़ी देश भी है कि उनकी दो महने में इकॉनमी समाप्त हो गई है।
वे भी अपना तेल नहीं बेच पा रहे हैं। यूएस प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप ने पहली बार ईरान अमेरिका युद्ध में राहत की सांस ले रहे हैं क्योंकि ईरान अब हॉर्मूज खोलने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समक्ष गिड़गिड़ा रहा है।
अगर यही हालत रहे तो ईरान के तेल रिफाइनरी और पंपिंग को बंद करना पड़ सकता है और पंपिंग स्टेशन बंद हुए तो समुद्र का पानी उसमें भर सकता जिससे ईरान को अरबों डॉलर का नुक्सान हो सकता है।जहां तक समझते की बात है अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान, रूस को कह दिया कि ईरान जब तक परिशोधित यूरेनियम 440 द्मद्द उसे सौंपता नहीं है तब तक हॉर्मूज में नाके बंदी समाप्त नहीं होगा। इससे ईरान की लीडरशिप दौड़ी दौड़ी फिर रही है।
दूसरी ओर विश्व बिरादरी ने ऊर्जा,गैस, पेट्रोल के लिए अर्जेंटीना, मोरक्को का रुख कर लिया है। साउथ अफ्रीका ने अमेरिका से तेल लेना स्वीकार कर लिया। अमेरिकी रक्षा मंत्री रोबियो ने ईरान से कहा कि हॉर्मूज समुद्री क्षेत्र पर कोई बातचीत तब तक नहीं होगी जब तक परिशोधित यूरेनियम सौंपा नहीं जाता है।
यूएस प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि उसे कोई जल्दी नहीं है।ईरान के कट्टर पंथी नेता और मौजसफा खमनोई इस बात कतई तैयार नहीं कि ईरान अमेरिका को यूरेनियम सौंप दे।
इस लिए ईरान की लीडरशिप में मतभेद है। लेकिन इतना तय है कि ईरान को इस युद्ध से सम्मानजनक कुछ नहीं मिल सकता क्योंकि अगर परिशोधित यूरेनियम ही सौंपना था तो युद्ध से पहले ही समर्पण अधिक ठीक रहता था कम से कम लीडरशिप और बुनियादी ढांचे को नष्ट होने से बचाया जा सकता था।युद्ध से पहले अमेरिका संस्टिंस हटा सकता था और खाड़ी देशों में फ्रिज 7 अरब डॉलर को रिहा कर सकता था। ईरान का ये कुटनीतिज्ञ सफलता है।जबकि अमेरिका एक समय घुटनों पर आ गया था मगर पाकिस्तान ने मिस गाइड कर उससे युद्ध विराम कर वा दिया। (ये लेखक के अपने वि
चार हैं)

