चिंताजनक: आधुनिक जीवन में तेजी से बढ़ती जा रही है मोटापे की समस्या

चिंताजनक: आधुनिक जीवन में तेजी से बढ़ती जा रही है मोटापे की समस्या
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अमित बैजनाथ गर्ग

दुनिया भर के लिए मोटापा कितना गंभीर रोग बनता जा रहा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुनिया में हर आठ में से एक व्यक्ति मोटापे का शिकार है। स्वास्थ्य को लेकर जारी कई रिपोर्ट तस्दीक करती हैं कि भारत में भी मोटापा तेजी से पैर पसार रहा है। रिपोर्ट कहती हैं कि महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले मोटापा अधिक है। महिलाओं में मोटापे की दर 9.8 फीसद है वहीं पुरुषों में यह 5.4 फीसद है, जबकि लड़कियों में मोटापे की दर 3.1 फीसद और लडक़ों में 3.9 फीसद है।
बच्चों में भी मोटापा चार गुना तक बढ़ गया है। भारत में 40 प्रतिशत महिलाएं और 12 प्रतिशत पुरु ष पेट से जुड़े मोटापे से ग्रस्त हैं। शहरी क्षेत्रों में मोटापा ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा है। दक्षिण भारत में मोटापा अधिक है। केरल, तमिलनाडु, पंजाब और दिल्ली में मोटापे की दर ज्यादा है। मध्य प्रदेश और झारखंड में मोटापे की दर कम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, 2022 में एक अरब से ज्यादा लोग इस समस्या से जूझ रहे थे। अध्ययन कहता है कि 2022 में अधिक वजन वाले वयस्कों की संख्या करीब 43 फीसद थी। यूरोप में अधिक वजन या मोटापा लोगों की मृत्यु और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है।
एक अनुमान के मुताबिक, मोटापे के चलते पूरी दुनिया में हर वर्ष 12 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि अधिक वजन वाले और मोटापा ग्रस्त लोग कोविड महामारी के परिणामों से अलग-अलग रूप से प्रभावित हुए हैं, जिन्हें अक्सर अधिक गंभीर बीमारी और अन्य जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है। अधिक वजन या मोटापे को कम से कम 13 विभिन्न प्रकार के कैंसर का कारण माना जाता है, जो पूरे यूरोप में सालाना कैंसर के कम से कम दो लाख नये मामलों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हो सकता है।


असल में मोटापे को एक जटिल दीर्घकालिक बीमारी समझा जाता है, जो संकट बन गई है। यह ऐसी महामारी के रूप में उभर रहा है, जिसमें पिछले कुछ दशकों में भारी वृद्धि हुई है। द लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 1990 के बाद से मोटापे की चपेट में आने वाले वयस्कों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। अध्ययन रिपोर्ट कहती है कि मोटापा कई गैर-संचारी रोगों के खतरे को बढ़ाता है, जिनमें हृदय रोग, टाइप-2 मधुमेह (डायबिटीज) और सांस संबंधी पुरानी बीमारियां शामिल हैं।
कई देशों में मोटापा सेहतमंद बनाम गैर-सेहतमंद भोजन का मामला भी बन गया है। कई बार सेहतमंद भोजन की कीमत ज्यादा होने या उपलब्ध न होने पर भी लोग ऐसे भोजन को प्राथमिकता देते हैं, जो मोटापा बढ़ा सकते हैं। एक्सपर्ट कहते हैं कि वे मोटापे के आंकड़े को वर्षो से देखते रहे हैं। मोटापे की बढ़ती रफ्तार से हैरान हैं। कुछ एक्सपर्ट मोटापे को दो नई कैटेगरी में बांटने की वकालत भी करते हैं। पहली, क्लीनिकल मोटापा। इसका मतलब है मोटापे की वजह से हमारे शरीर का कोई अंग ठीक से काम नहीं कर रहा है, जैसे कि दिल, किडनी या लिवर। दूसरी है प्री-क्लीनिकल मोटापे की श्रेणी। इसका मतलब है कि अभी तक कोई बीमारी नहीं हुई है, लेकिन मोटापे की वजह से बीमार होने का खतरा बढ़ गया है।
तेल मोटापे की सबसे बड़ी वजह है। अगर तेल के इस्तेमाल में धीरे-धीरे कटौती करेंगे तो वजन घटेगा। मोटापे से बचने के लिए आहार और जीवनशैली में बदलाव करें। रोजाना जितनी कैलोरी बर्न करते हैं, उससे ज्यादा कैलोरी न खाएं। चीनी-मीठे पेय पदाथरे का सेवन सीमित करें। ज्यादा वसा वाले खाद्य पदाथरे से परहेज करें। प्रोटीन के स्रेतों जैसे बीन्स, दाल और सोया का सेवन बढ़ाएं। फल, सब्जियां, साबुत अनाज खाएं। भरपूर पानी पिएं। खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं। सप्ताह तीन से चार दिन औसतन 60 से 90 मिनट या उससे ज्यादा मध्यम से तीव्र शारीरिक गतिविधि करें। टहलना, सीढ़ियां चढ़ना-उतरना, बगीचे में काम करना, टेनिस खेलना, बाइकिंग, स्केटिंग जैसी गतिविधियां करें। पर्याप्त नींद लें और तनाव प्रबंधन करें। व्यवहार संबंधी उपचार जैसे समूह परामर्श और सत्रों में शामिल हों। ध्यान रखें कि वजन धीरे-धीरे घटाने से वजन को बनाए रखने की संभावना ज्यादा होती है। इस तरह कुछ बातों का ध्यान रख कर मोटापे की समस्या से निजात पाई जा सकती है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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