अवैध खनन व स्टोन क्रशर के मामलों की अब 25 फरवरी को होगी सुनवाई

अवैध खनन व स्टोन क्रशर के मामलों की अब 25 फरवरी को होगी सुनवाई
Spread the love

नैनीताल। हाई कोर्ट ने प्रदेश की खनन नीति, अवैध खनन, बिना पीसीबी के अनुमति के संचालित स्टोन क्रेशरों व आबादी क्षेत्रो में संचालित स्टोन क्रेशरों के खिलाफ 35 से अधिक जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। कोर्ट ने मामलों को सुनने के बाद सरकार से 25 फरवरी तक यह बताने को कहा है कि कितनी जनहित याचिकाओ में नई माइनिंग पॉलिसी और कितनी जनहित याचिकाओ में पुरानी माइनिंग पॉलिसी को चुनौती दी गयी है। अगली सुनवाई के लिए 25 फरवरी 2022 की तिथि नियत की है। सोमवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश सजंय कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ में सुनवाई की दौरान सरकार की तरफ से नियुक्त स्पेशल काउंसिल वरिष्ठ अधिवक्ता अवतार सिंह रावत ने कोर्ट को बताया कि अधिकतर जनहित याचिकाओ में पुरानी माइनिंग पॉलिसी को चुनौती दी गयी है जबकि सरकार ने नई माइनिंग पॉलिसी को लागू कर दिया है , इसलिए यह जनहित याचिकाएँ निरस्त होने योग्य है।

बाजपुर निवासी रमेश लाल, मिलख राज, रामनगर निवासी शैलजा साह, त्रिलोक चन्द्र, जयप्रकाश, नौटियाल, आनंद सिंह नेगी, वर्धमान स्टोन क्रेशर, शिव शक्ति स्टोन क्रेशर, बलविंदर सिंह, सुनील मेहरा, गुरमुख स्टोन क्रशर सहित अन्य ने 29 से अधिक जनहित याचिकाएं दायर की गई है। ये याचिकाएं विभिन्न बिंदुओं को लेकर दायर की गई है। कुछ याचिकाओ में प्रदेश की खनन नीति को चुनौती तो कुछ में आबादी क्षेत्रो में चल रहे स्टोन क्रेशरों को हटाए जाने की मांग की गई। कुछ जनहित याचिकाओं में स्टोन क्रेशरों से अवैध रूप से किये जा रहे खनन तथा कुछ स्टोन क्रेशरों द्वारा पीसीबी के मानकों को पूरा नही करने के खिलाफ दायर की गई है। जैसे शैलजा साह ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि अल्मोड़ा के मासी में रामगंगा नदी के किनारे से 60 मीटर दूरी पर रामगंगा स्टोन क्रशर लगाया गया है , जो पीसीबी के नियमो के विरुद्ध है।

Parvatanchal