समस्या: अंकुश लगाना होगा निर्माण सामग्री की कीमतों पर
अनुराग गुप्ता
महंगाई की मार वैसे तो चहुंओर पड़ती है लेकिन यही मार जब अपने घर की चाह रखने वालों पर पड़ती है तो उनका यह सपना टूटता नजर आता है। हर कोई चाहता है कि जीवन में कम से कम एक बार वह अपने लिए घर जरूर बनवाए। इसके लिए जीवन भर की गाढ़ी कमाई के साथ-साथ कर्ज के बोझ को झेलना भी मंजूर होता है। महानगरों व दूसरे बड़े शहरों में रोजी-रोटी की तलाश में जाने वालों के लिए तो घर बनाना और भी मुश्किल होता जा रहा है। इस दिशा में यह ताजा रिपोर्ट ज्यादा चिंतित करने वाली है जिसमें कहा गया है कि पिछले दो साल में देश के शीर्ष प्रॉपर्टी बाजार में घरों की बढ़ती मांग के बीच इनके दाम भी बीस फीसदी तक बढ़ गए हैं। देश की राजधानी दिल्ली में मकान महंगे होेने की रफ्तार सबसे ज्यादा है।
यह तस्वीर ऐसे दौर की है, जब सरकारें भी लोगों को घर उपलब्ध कराने की योजनाएं जोर-शोर से लागू करती हैं। लेकिन, ये योजनाएं निम्न आय वर्ग तक ही सीमित रहती हैं। निम्न मध्यम वर्ग व मध्यम वर्ग भी कम परेशान नहीं है। इसकी वजह यह है कि एक तो नौकरी अथवा व्यापार के सिलसिले में उसकी इन महानगरों व दूसरे शहरों का रुख करने की मजबूरी होती है। वहीं आय के साधन अपेक्षाकृत सीमित ही होते हैं। वैसे भी बड़े शहरोें में बढ़ती आबादी के अनुपात में रहवास की समस्या का समाधान करना काफी मुश्किल होता है। अधिकांश महानगर कोसों दूर तक पसर गए हैं। क्रेडाई- कोलियर्स- लियासेस फोरास हाउसिंग प्राइस ट्रैकर रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली एनसीआर, बेंगलूरु और कोलकाता में तोे दो साल में घरों की कीमत तीस फीसदी तक बढ़ गई है।

बड़ी वजह यह भी है कि जमीनों के दाम बढ़ने के साथ-साथ निर्माण सामग्री के दाम भी लगातार बढ़ ही रहे हैं। महंगी निर्माण सामग्री के कारण बिल्डर्स के भी कई प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हो पा रहे। सरकारों ने तो पहले से ही सस्ते आवास उपलब्ध कराने की योजनाओं से हाथ खींच रखा है। जहां कहीं बड़े शहरों में सरकारों की आवासीय योजनाएं बनी भी हैं, उनमें भी अधिकांश लोगों के कार्यस्थल से काफी दूर हैं। रही-सही कसर आवागमन के साधनों की कमी से पूरी हो जाती है।
अनुमान है कि आगामी दस बरस में भारत को करीब साढ़े छह करोड़ नए घरों की जरूरत होगी। लोगों का अपने घर का सपना पूरा करने के लिए सरकारों को भी न केवल नई आवासीय योजनाएं विकसित करनी होंगी, बल्कि मकान बनाने में गुणवत्ता का ध्यान भी रखना होगा। घर बनाने के इच्छुक लोगों को आर्थिक रूप से राहत तब ही मिल पाएगी, जब सीमेंट-बजरी व स्टील जैसी निर्माण सामग्री के बढ़ते दामों पर भी अंकुश लगाने का काम होगा।

