शिकंजा: एमबीबीएस में फर्जी दाखिले मामले में धरे गये तीन आरोपी

शिकंजा: एमबीबीएस में फर्जी दाखिले मामले में धरे गये तीन आरोपी
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देहरादून। उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र समेत अन्य दस्तावेजों में कथित फर्जीवाड़ा कर एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रवीण कुमार, जगपाल सिंह और रामपाल सिंह के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने अपनी बेटियों को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के लिए कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड, स्थायी निवास प्रमाणपत्र और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार करवाए थे। इन दस्तावेजों के आधार पर एक बेटी का मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराया गया, जबकि दूसरी को नीट काउंसलिंग में शामिल कराया गया था। एसआईटी अब तक इस प्रकरण में आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस के मुताबिक, 13 सितंबर 2026 को थाना रायपुर और थाना क्लेमेनटाउन में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। आरोप था कि कुछ अभ्यर्थियों ने सरकारी पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करते समय कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत किए। जांच के दौरान संबंधित दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर दोनों थानों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अभियोग पंजीकृत किए गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की। टीम ने आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने शुरू किए। जांच के दौरान अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए। इसके बाद एसआईटी ने संबंधित शिक्षण संस्थानों में पहुंचकर दाखिले से जुड़े दस्तावेज कब्जे में लिए। इन दस्तावेजों के परीक्षण से अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी मिली, जिसके आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई।
विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने प्रवीण कुमार, जगपाल सिंह और रामपाल सिंह को पूछताछ के लिए बुलाया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में प्रवीण कुमार और जगपाल सिंह ने बताया कि उनकी मुलाकात पूर्व में गिरफ्तार आरोपी रूपेश पंडित से हुई थी। रूपेश अपने साथियों के साथ पिछले पांच वर्षों से एजुकेशन कंसल्टेंसी का काम कर रहा था। वह मेरठ में ‘मिकोडो’ (MECODO) पाठशाला नाम से कंपनी संचालित करता था। पुलिस के मुताबिक, इस माध्यम से वह विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों और विदेशों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए तथा बीकॉम जैसे पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिला दिलाने का काम करता था।
जांच के अनुसार, प्रवीण कुमार और जगपाल सिंह ने अपनी बेटियों खुशी और स्वाति के एमबीबीएस में दाखिले के लिए रूपेश पंडित से संपर्क किया था। आरोप है कि दोनों ने बेटियों के लिए फर्जी आधार कार्ड, निवास प्रमाणपत्र और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार करवाए। इन दस्तावेजों के आधार पर खुशी का मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराया गया, जबकि स्वाति को नीट काउंसलिंग में शामिल कराया गया।
पुलिस का कहना है कि इन प्रमाणपत्रों को तैयार करवाने के एवज में प्रवीण कुमार ने रूपेश पंडित को 25 लाख रुपये और जगपाल सिंह ने 30 लाख रुपये दिए थे। इस प्रकार दोनों मामलों में कुल 55 लाख रुपये के भुगतान की बात पूछताछ में सामने आई है। इन आरोपों की पुष्टि विवेचना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
तीसरे आरोपी रामपाल सिंह के संबंध में पुलिस ने बताया कि उसने अपने परिचित विशाल कुमार के साथ मिलकर अपनी बेटी तृप्ति का नीट के माध्यम से एमबीबीएस में दाखिला कराने की योजना बनाई थी। आरोप है कि इसके लिए बेटी के नाम पर फर्जी स्थायी निवास प्रमाणपत्र, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र और आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज तैयार करवाए गए। पुलिस के अनुसार, इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बेटी का दाखिला जीएमसी मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार में कराया गया।
एसआईटी इस बात की जांच कर रही है कि दस्तावेज किसने तैयार किए, उन्हें तैयार कराने में और कौन-कौन शामिल था तथा दाखिले की प्रक्रिया में इनका इस्तेमाल किन स्तरों पर किया गया। जांच के दायरे में प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। एसआईटी इस मामले में फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने, उनके इस्तेमाल और मेडिकल कॉलेजों में दाखिले से जुड़े सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक, प्रकरण में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका का भी पता लगाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर संबंधित आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गिरफ्तार आरोपी प्रवीण कुमार (48 वर्ष): पुत्र धन सिंह, निवासी गांव बड़कता, थाना एवं तहसील बुढ़ाना, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश, जगपाल सिंह (50 वर्ष): पुत्र बलवीर सिंह, निवासी वार्ड नंबर-9, केशव नगर, लक्सर, जिला हरिद्वार व रामपाल सिंह (52 वर्ष): पुत्र हरि सिंह, निवासी मोहल्ला चौहाना, कीरतपुर, जिला बिजनौर, उत्तर प्रदेश बताए जा रहे
वहीं, रामपाल सिंह पर अपनी बेटी तृप्ति का एमबीबीएस में दाखिला कराने के लिए परिचित विशाल कुमार के साथ मिलकर फर्जी स्थायी निवास प्रमाणपत्र, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र और आधार कार्ड तैयार करवाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बेटी का दाखिला जीएमसी मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार में कराया गया। एसआईटी मामले में दस्तावेज तैयार करने से लेकर उनके इस्तेमाल और दाखिला प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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