आरटीआई में खुलासा: आयकर अपीलीय अधिकरण की बेंगलुरु बेंच में 4,209 मामले लंबित

आरटीआई में खुलासा: आयकर अपीलीय अधिकरण की बेंगलुरु बेंच में 4,209 मामले लंबित
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2021 से 2025 के बीच दाखिल हुईं 9,413 अपीलें, निस्तारण के आंकड़ों में भी उतार-चढ़ाव

पांच वित्तीय वर्षों के बजट और खर्च का ब्योरा आया सामने

देहरादून । सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी में भारत सरकार के आयकर अपीलीय अधिकरण की बेंगलुरु बेंच में लंबित मामलों, अपीलों के निस्तारण, कर्मचारियों की स्थिति और सरकारी खर्च से संबंधित महत्वपूर्ण विवरण सामने आए हैं। आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गोनिया की ओर से मांगी गई सूचना के जवाब में अधिकरण ने संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए। जानकारी प्राप्त करने के लिए गोनिया को प्रथम अपील करने के साथ ही ऑनलाइन सुनवाई में भी शामिल होना पड़ा।
अधिकरण के अभिलेखों के अनुसार, 1 जून 2026 तक बेंगलुरु बेंच में 4,209 मामले लंबित थे। वर्ष 2021 से 2025 के बीच दाखिल अपीलों की संख्या में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव रहा। वर्ष 2021 में 953, वर्ष 2022 में 1,256, वर्ष 2023 में 1,232, वर्ष 2024 में 2,708 और वर्ष 2025 में 3,264 अपीलें दाखिल हुईं।
इन पांच वर्षों में कुल 9,413 अपीलें दाखिल होने का आंकड़ा सामने आता है। दूसरी ओर, इसी अवधि में निस्तारित मामलों की संख्या वर्ष 2021 में 2,578, वर्ष 2022 में 2,314, वर्ष 2023 में 1,252, वर्ष 2024 में 1,922 और वर्ष 2025 में 2,137 दर्ज की गई।
आंकड़ों से स्पष्ट है कि अपीलों के दाखिल होने और उनके निस्तारण की संख्या में हर साल अंतर रहा। हालांकि, लंबित मामलों की वास्तविक प्रवृत्ति का आकलन करने के लिए पुराने लंबित मामलों, स्थानांतरित प्रकरणों और अन्य श्रेणियों के मामलों का भी मिलान करना जरूरी है।
आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों में अपीलों के निर्णय की विभिन्न श्रेणियों का विवरण भी शामिल है। वर्ष 2021 में 1,151 अपीलें मंजूर, 474 आंशिक रूप से मंजूर और 953 खारिज दर्ज की गईं। वर्ष 2022 में 1,132 अपीलें मंजूर, 765 आंशिक रूप से मंजूर और 417 खारिज बताई गई हैं।
वर्ष 2023 के आंकड़ों में 573 अपीलें खारिज, 521 अन्य प्रकृति की और 158 मंजूर दर्ज हैं। वर्ष 2024 में 972 आंशिक रूप से मंजूर, 682 खारिज और 268 अन्य प्रकृति की अपीलें दर्ज की गईं। वहीं, वर्ष 2025 में 1,196 अपीलें मंजूर, 529 आंशिक रूप से मंजूर और 412 खारिज बताई गई हैं।
निर्णयों की इन श्रेणियों और कुल निस्तारण के आंकड़ों में कुछ अंतर दिखाई देता है। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले मूल दस्तावेजों में दर्ज आंकड़ों का सत्यापन आवश्यक है।
अधिकरण ने विभिन्न पदों पर कर्मचारियों और उनके वेतन स्तर से संबंधित विवरण भी उपलब्ध कराया है। इसमें उपाध्यक्ष, लेखाकार सदस्य, न्यायिक सदस्य, सहायक रजिस्ट्रार, वरिष्ठ निजी सचिव, निजी सचिव, कार्यालय अधीक्षक, उच्च एवं निम्न श्रेणी लिपिक और मल्टी टास्किंग स्टाफ जैसे पद शामिल हैं।
हालांकि, उपलब्ध विवरण में पदवार कर्मचारियों की वास्तविक संख्या और रिक्तियों का पूरा ब्योरा नहीं होने के कारण कर्मचारियों की उपलब्धता या कमी के संबंध में निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
आरटीआई के तहत वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक विभिन्न मदों में स्वीकृत अनुदान और वास्तविक व्यय की जानकारी भी दी गई है। इसमें वेतन, भत्ते, चिकित्सा, कार्यालय खर्च, घरेलू यात्रा, कंप्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी, एसएपी, आतिथ्य, पुरस्कार, ईंधन, किराया और डिजिटल उपकरण जैसी मदें शामिल हैं।
वर्ष 2021-22 में वेतन एवं भत्तों के लिए 4.89 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए, जिनमें से 4.69 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए। चिकित्सा मद में 1.70 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जबकि वास्तविक व्यय लगभग 13.92 लाख रुपये दर्ज किया गया। कार्यालय खर्च के लिए 77 लाख रुपये स्वीकृत हुए और करीब 75.76 लाख रुपये खर्च किए गए।
वर्ष 2022-23 में वेतन एवं भत्तों के लिए छह करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए और लगभग 5.56 करोड़ रुपये खर्च हुए। चिकित्सा मद में 4.96 लाख रुपये से अधिक और कार्यालय खर्च में 81.13 लाख रुपये का व्यय दर्ज किया गया।
वर्ष 2023-24 में वेतन मद में 2.70 करोड़ रुपये से अधिक स्वीकृत हुए और करीब 2.60 करोड़ रुपये खर्च किए गए। भत्तों के लिए 2.14 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृत राशि के बराबर व्यय दर्ज बताया गया। चिकित्सा मद में लगभग 4.15 लाख रुपये और कार्यालय खर्च में 66.54 लाख रुपये से अधिक खर्च हुए।
वर्ष 2024-25 में वेतन मद के लिए 3.19 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए, जिनमें से लगभग 3.14 करोड़ रुपये खर्च हुए। भत्तों के लिए 2.90 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान था और लगभग पूरी राशि खर्च की गई। चिकित्सा मद में करीब 9.92 लाख रुपये और कार्यालय खर्च में लगभग 85.39 लाख रुपये का व्यय दर्ज किया गया।
वर्ष 2025-26 में वेतन मद के लिए तीन करोड़ रुपये से अधिक स्वीकृत हुए, जिनमें से लगभग 2.98 करोड़ रुपये खर्च किए गए। भत्तों में करीब तीन करोड़ रुपये, चिकित्सा मद में लगभग 37.98 लाख रुपये, घरेलू यात्रा में 5.10 लाख रुपये और कार्यालय खर्च में करीब 75.98 लाख रुपये व्यय दर्ज किया गया।

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